द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रूस और यूक्रेन की भिड़ंत सबसे बड़ी जंग है. 1460 दिन से चल रही जंग ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को बदला. रूस को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा. 9.25 लाख मौतें हुईं. पैसा पानी की तरह बहाया गया. 24 फरवरी, 2022 से शुरू हुई दोनों देशों की जंग के 4 साल पूरे हो गए हैं. 24 फरवरी, 2022, यह वो तारीख है जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया और खत्म न होने वाली जंग का आगाज किया. युद्ध के 4 साल पूरे हो चुके हैं. दूर-दूर तक जंग पूरी तरह खत्म होने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं. इन 1460 दिनों में दोनों देशों के 9.25 लाख सैनिकों-नागरिकों ने दम तोड़ा.
दोनों देशों ने 4 साल में क्या-क्या खोया और और जंग का कितना असर क्लाइमेट पर पड़ा.? रूस और यूक्रेन की जंग दोनों के लिए कैसे नाक का सवाल बन गई, आंकड़े इसकी कहानी कहते हैं. सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) और स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट जंग की दर्दभरी कहानी कहती है.
CSIS के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 4 सालों में रूस से सैनिकों और नागरिकों को मिलाकर 3,25,000 मौते हुईं. यूक्रेन में यह आंकड़ा लगभग दोगुना है. रूस की तरफ से किए गए हमलों में यूक्रेन के 6,00,000 लोगों ने दम तोड़ा. इसमें सैनिक और नागरिक दोनों शामिल हैं और पिछले 4 सालों में यूक्रेन के 15,168 लोग मारे गए. 41,534 बुरी तरह घायल हुए.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जंग की शुरुआत से पहले साल 2021 में यूक्रेन का रक्षा बजट मात्र 58 करोड़ रुपए था. जंग शुरू होने के बाद साल 2022 में यूक्रेन का डिफेंस बजट 3.5 लाख करोड़ रुपए हो गया. हालांकि साल 2023 और 2024 में यूक्रेन ने जंग के लिए अपना बजट 5.91 लाख करोड़ रुपए रखा.
वहीं जंग से पहले रूस रक्षा बजट 5.5 लाख करोड़ रुपए था जो जंग के बाद साल 2022 में डेढ़ गुना से अधिक बढ़ गया. साल 2022 में यह आंकड़ा 8.56 लाख करोड़ रुपए हो गया. साल 2023 में रूस ने रक्षा बढ़ाकर 9.14 लाख करोड़ कर दिया और 2024 में यह बढकर 13 लाख करोड़ रुपए हो गया.
मार्च 2022 में रूस ने हमला करके यूक्रेन के 26 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया था.वाशिंगटन के थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर कहती है, भौगोलिक फुटेज से इसकी पुष्टि होती है. इसमें क्रीमिया भी शामिल था, जिस पर रूस ने जनवरी 2014 में कब्जा कर लिया था, और लुहांस्क और डोनेट्स्क के पूर्वी क्षेत्रों के बड़े हिस्से भी शामिल थे, जहां फरवरी 2014 से रूसी समर्थक अलगाववादी ताकतें कीव की सेनाओं से लड़ रही थींं.
यूक्रेन ने रूस को उत्तरी शहरों – कीव, खारकीव, सूमी और चेर्निहीव से पीछे धकेल दिया, जिससे रूस के पास देश का 20 प्रतिशत हिस्सा रह गया. अगस्त और सितंबर 2022 में, यूक्रेन के तत्कालीन थल सेना कमांडर ओलेक्सांद्र सिरस्की ने उत्तरी खार्किव क्षेत्र में ओस्किल नदी के पूर्व में रूस को धकेलने के लिए एक अभियान की योजना बनाई, और रूस खुद दक्षिणी खेरसोन क्षेत्र में नीप्रो नदी के पूर्व में पीछे हट गया, जिससे उसके पास देश का 17.8 प्रतिशत हिस्सा रह गया.
पिछले तीन सालों में, रह-रह कर युद्ध हो रहा है. रूस को भी संघर्ष करना पड़ा है. इस दौरान, रूसी सेना भारी नुकसान उठाते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ी. रूसी सेना ने दिसंबर 2025 तक यूक्रेन के कुल क्षेत्रफल के 19.3 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया.
रूस और यूक्रेन की जंग मानवीय संकट को जन्म दिया है. पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है. जिससे वायुमंडल में भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैसें बढ़ी हैं.
जंग के कारण बढ़ने वाली ग्रीन हाउस गैसों का दूसरा मूल्यांकन युद्ध शुरू होने के 12 महीने बाद किया गया. क्लाइमेट फोकस की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग शुरू होने के 7 महीनों के अंदर 100 मिलियन टन CO2 था. रिपोर्ट में पाया गया कि युद्ध के बारह महीनों के दौरान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कुल मिलाकर 120 मिलियन टन CO2 रहा. इससे पता चलता है कि जंग कैसे देश की अर्थव्यवस्था को पीछे धकेलने के साथ पर्यावरण को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है.
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