Alexander Leonov Passes Away: दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos) और हाइपरसोनिक मिसाइल जिरकॉन देने वाले रूसी मिसाइल डिजाइनर अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन हो गया है। लियोनोव ने 74 साल की उम्र में 5 अप्रैल को अंतिम सांस ली। लियोनोव रूस की कंपनी NPOMASH के CEO और चीफ डिजाइनर थे। यही कंपनी दिल्ली के ब्रह्मोस एयरोस्पेस की रूसी साझेदार है। लियोनोव ने ही रूस की घातक हाइपरसोनिक मिसाइल जिरकॉन भी डिजाइन की थी।

रूसी प्रशासन द्वारा अलेक्जेंडर की मौत पर आधिकारित तौर पर जानकारी नहीं दी गई है कि उनकी मौत कैसे हुई और कहां हुई है। यह जानकारी समाचार पोर्टल RBC ने दी है। खास बात यह है कि अलेक्जेंडर लियोनोव रूस की अग्रणी डिफेंस कंपनी NPO Mashinostroyenia के CEO और चीफ डिजाइनर थे।

लियोनोव को रूस की हाइपरसोनिक मिसाइल- जिरकोन मिसाइल (त्सिरकोन) के डिजाइन का श्रेय दिया जाता है। यह एक जहाज से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे समुद्र और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। यह 3K22 मिसाइल सिस्टम का हिस्सा है, जिसे जनवरी 2023 में सेवा में शामिल किया गया था। यह मिसाइल नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों से छोड़ी जा सकती है और इसे तटीय रक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। RBC ने बताया कि जिरकॉन मिसाइल की स्पीड मैख 9 तक हो सकती है, यानी आवाज़ की गति से लगभग 9 गुना तेज। इसकी मारक दूरी लगभग 400 से 1500 किलोमीटर तक है और यह सामान्य और परमाणु, दोनों तरह के वारहेड ले जा सकती है।

हीरो ऑफ लेबर अवॉर्ड से सम्मानित

लियोनोव को हीरो ऑफ लेबर अवॉर्ड (Hero of Labour) का गोल्डन स्टार सम्मान भी मिला था। उन्होंने अंतरिक्ष प्रणालियों और मिसाइल प्रणालियों के डिजाइन के काम की देखरेख की। उन्होंने ग्रेनाइट मिसाइल, वल्कन मिसाइल और बैस्टियन तटीय रक्षा प्रणाली जैसे तटीय रक्षा सिस्टम के विकास और उन्हें सेवा में शामिल करने में हिस्सा लिया। इन प्रणालियों में ओनिक्स मिसाइल (जिस पर भारत-रूस की ब्रह्मोस मिसाइल आधारित है) का इस्तेमाल किया जाता है।

ब्रह्मोस का अगला वर्जन ब्रह्मोस एनजी मिसाइल भी इन्हीं की लीडरशिप में तैयार हुआ

उनकी लीडरशिप में ब्रह्मोस का अगला वर्जन ब्रह्मोस एनजी मिसाइल तैयार हुआ है। इसके साथ ही ग्रैनिट, वल्कन, बैस्टियन और ओनिक्स जैसे सिस्टम में उनका योगदान रहा है। यह सहयोग मिसाइल टेक्नोलॉजी में भारत और रूस के बीच रणनीतिक संबंधों का आधार रहा है।

ब्रह्मोस नाम क्या है मतलब?

ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस की रणनीति साझेदारी का उदाहरण है। इसका नाम दो नदियों के नामों को जोड़कर रखा गया है। ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मॉस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ब्रह्मपुत्र से ब्रह्म और मॉस्कवा नदी से मॉस शब्द लेकर ब्रह्मोस शब्द बना। यह मिसाइल भारत और रूस की साझेदारी का प्रतीक बनी। दोनों देशों ने मिलकर इसे विकसित किया है। यही वजह है कि इसके नाम में दोनों देशों का कनेक्शन नजर आता है।

1952 में ताम्बोव क्षेत्र के मोर्शांस्क में हुआ था जन्म

लियोनोव का जन्म 26 फरवरी, 1952 को ताम्बोव क्षेत्र के मोर्शांस्क में हुआ था। 1975 में उन्होंने मॉस्को एविएशन इंस्टीट्यूट से ग्रेजुएशन किया। सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग (अब एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया) में नौकरी की शुरुआत की। यहीं वो डिज़ाइन इंजीनियर बने और इसे बुलंदी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

रूस के साथ भारत को भी झटका
NPO Mashinostroyenia वही कंपनी है, जिसके साथ मिलकर भारत की DRDO ने ब्रह्योस मिसाइल विकसित की थी। यह कंपनी भारत में स्थित ब्रह्योस एयरोस्पेस की रूसी पार्टनर है। रूसी वैज्ञानिक का निधन न केवल रूस के अपूर्णीय क्षति है, बल्कि भारत के लिए भी झटका है। क्योंकि अलेक्जेंडर भारत-रूस के सहयोग से बन रही नेक्स्ट जेनरेशन ब्रह्योस जिसे Brahmos-NG कहा जा रहा है, उसके डेवलपमेंट पर काम कर रहे थे।

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