नए साल की पूर्व संध्या और 1 जनवरी की रात रूस की ओर से यूक्रेन में ताबड़तोड़ ड्रोन हमले किये गए. यह हमले यूक्रेन स्थित तेल ढांचों को टारगेट कर किये गए. इन हमलों की वजह से तेल ढांचे भीषण आग की चपेट ,में आ गए. रूसी मीडिया के मुताबिक, कालूगा क्षेत्र के ल्यूदिनोवो ऑयल डिपो और क्रास्नोडार क्राय स्थित इल्स्की ऑयल रिफाइनरी में आग लग गई. दोनों ठिकानों को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया, जिससे रूस-यूक्रेन युद्ध में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की रणनीति और तेज होती दिख रही है.

कालूगा और क्रास्नोडार में दो अलग-अलग हमले

रिपोर्ट के अनुसार, ल्यूदिनोवो ऑयल डिपो (कालूगा क्षेत्र) पर हमला 31 दिसंबर को न्यू ईयर काउंटडाउन से ठीक पहले हुआ, जबकि क्रास्नोडार क्राय की इल्स्की ऑयल रिफाइनरी को 1 जनवरी की आधी रात के बाद निशाना बनाया गया. दोनों जगहों पर आग लगने की पुष्टि रूसी मीडिया और सार्वजनिक टेलीग्राम चैनलों ने की है.

इल्स्की ऑयल रिफाइनरी में भीषण आग

क्रास्नोडार क्षेत्र की इल्स्की ऑयल रिफाइनरी पर यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई. इसे 2026 में आग की चपेट में आने वाली रूस की पहली ऑयल रिफाइनरी बताया जा रहा है. हमले के बाद रिफाइनरी परिसर से आग और धुएं के बड़े गुबार उठते नजर आए.

राहत और बचाव कार्य जारी

हमलों के बाद स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है. फिलहाल किसी के हताहत होने या कुल नुकसान को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है.

31 दिसंबर की रात तुआप्से रिफाइनरी भी निशाने पर

इससे पहले 31 दिसंबर की रात यूक्रेन की डिफेंस फोर्सेज ने रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र स्थित तुआप्से ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला किया था. इस हमले में तामाननेफ्तेगाज़ टर्मिनल, रिजर्व फ्यूल डिपो और कब्जे वाली सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे गोला-बारूद गोदामों को भी निशाना बनाया गया. रूसी मीडिया के अनुसार, इससे भी पहले 28 दिसंबर की रात यूक्रेन की डिफेंस फोर्सेज ने रूस की सिजरान ऑयल रिफाइनरी पर हमला किया था, जिससे तेल ढांचे पर दबाव और बढ़ गया था.

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