विकास कुमार/ ​सहरसा। केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के विरोध में गुरुवार को वामपंथी संगठनों, भारतीय ट्रेड यूनियन और किसान सभा द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी बंद का सहरसा में व्यापक असर देखने को मिला। जिले के प्रमुख वीर कुंवर सिंह चौक पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर आवागमन बाधित किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​प्रमुख चौक-चौराहों पर रहा प्रदर्शन का असर

​आंदोलनकारियों ने शहर के मुख्य चौराहों को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर मजदूर और किसान विरोधी होने का आरोप लगाया। संगठनों के बैनर तले जुटे कार्यकर्ताओं के कारण सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं, हालांकि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने का प्रयास किया गया।
​किसान नेता रणधीर यादव का बयान दोपहर करीब 12 बजे मीडिया को संबोधित करते हुए किसान सभा के कद्दावर नेता रणधीर यादव ने कहा कि यह राष्ट्रव्यापी बंद देश के अन्नदाताओं और श्रमिकों के हक की आवाज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों पर विचार नहीं करती, आंदोलन का सिलसिला जारी रहेगा।

​प्रमुख मांगें जिन पर रहा जोर:

​प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों को सरकार के सामने रखा:
​श्रम संहिता: नए श्रम कानूनों को तत्काल वापस लिया जाए।

​MSP की गारंटी: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए।

​पेंशन योजना: पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पुनः बहाल किया जाए।

​सार्वजनिक उपक्रम: सार्वजनिक संस्थानों में मजदूर संगठनों की मान्यता बहाल हो।

​मनरेगा: मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी (मजदूरी) में उचित बढ़ोतरी की जाए।