विकास कुमार/सहरसा। उत्तर बिहार के सहरसा जिले में भूकंप जैसी विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी को परखने के लिए गुरुवार को एक वृहद मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। सहरसा स्टेडियम में सुबह ठीक 9:30 बजे सायरन बजते ही बचाव अभियान शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और जान-माल के नुकसान को कम करना था।
बचाव और राहत कार्यों का जीवंत प्रदर्शन
स्टेडियम के मैदान में आयोजित इस अभ्यास के दौरान SDRF (राज्य आपदा मोचन बल) की टीम ने अत्यंत पेशेवर तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। मॉक ड्रिल के दौरान यह दिखाया गया कि यदि भूकंप के कारण इमारतें गिर जाएं या लोग मलबे में फंस जाएं, तो उन्हें आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए। साथ ही, अग्निशमन दल ने आग पर काबू पाने और रेडक्रॉस की टीम ने घायलों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराकर अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
पांच स्थानों पर सघन अभ्यास
मौके पर मौजूद अपर समाहर्ता (आपदा) संजीव कुमार चौधरी ने बताया कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि जिला प्रशासन द्वारा जिले के कुल पांच चयनित संवेदनशील स्थलों पर इस तरह के मॉक ड्रिल किए जा रहे हैं।
जन-जागरूकता पर विशेष जोर
इस अभ्यास में नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की भी सक्रिय भागीदारी रही। अधिकारियों ने बताया कि आपदा के समय घबराने के बजाय धैर्य और सही तकनीक का प्रयोग कर कई जानें बचाई जा सकती हैं। मॉक ड्रिल के माध्यम से आम नागरिकों को भी जागरूक किया गया कि वे भूकंप के झटके महसूस होने पर झुको, ढको और पकड़ो जैसी सावधानियों का पालन करें।
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