विकास कुमार/सहरसा। उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सहरसा की सड़कों पर छात्रों और युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस विशाल प्रतिवाद मार्च के जरिए ‘यूजीसी रेगुलेशन-2026’ को तत्काल प्रभावी बनाने की हुंकार भरी गई।

​समाहरणालय तक जोरदार प्रदर्शन

​यह मार्च जिला परिषद प्रांगण से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए समाहरणालय तक पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान छात्र-युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्च शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय और कॉलेजों में ‘प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन-2026’ को पूरी तरह लागू करवाना है।

​राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

​मार्च के समापन पर प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी (DM) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। इसमें स्पष्ट मांग की गई कि केंद्र सरकार और यूजीसी सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए।

​रोहित एक्ट की उठी मांग

​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने कहा कि केवल रेगुलेशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और समानता के लिए “रोहित एक्ट” जैसे सशक्त कानून की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मार्च में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय युवा शामिल हुए।