रायपुर। किसी भी राज्य की प्रगति का सबसे मजबूत आधार उसका सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन और कुशल प्रशासनिक व्यवस्था होती है. जब शासन पारदर्शिता, अनुशासन और दूरदर्शिता के साथ कार्य करता है, तब न केवल राजस्व में वृद्धि होती है, बल्कि विकास की गति भी टिकाऊ बनती है. छत्तीसगढ़ में हाल के समय में यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला है कि प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय अनुशासन के समन्वित प्रयासों से राज्य की आर्थिक स्थिति लगातार सुदृढ़ हो रही है.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह सिद्ध किया है कि यदि नीयत साफ हो, नीतियाँ स्पष्ट हों और क्रियान्वयन मजबूत हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी राजस्व में सतत वृद्धि संभव है.

साय सरकार का वित्तीय प्रबंधन केवल आंकड़े नहीं बल्कि नीति का प्रतिबिंब

वित्तीय प्रबंधन को ज़्यादातर बजट, कर संग्रह या खर्च तक सीमित समझा जाता रहा है जबकि वास्तव में यह राज्य की नीतिगत सोच और प्रशासनिक क्षमता का दर्पण होता है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस अवधारणा को गहराई से समझते हुए वित्तीय प्रबंधन को दीर्घकालिक विकास रणनीति से जोड़ा है. छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि सरकारी खर्च उत्पादक क्षेत्रों में हो, अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण रखा जाए, राजस्व स्रोतों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जाए, इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह हुआ कि राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता बढ़ी.

प्रशासनिक सुधार बनी राजस्व वृद्धि की रीढ़

राजस्व बढ़ाने के लिए कर दरें बढ़ाना ही एकमात्र उपाय नहीं होता. इसके बजाय प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण, डिजिटलीकरण और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण कहीं अधिक कारगर सिद्ध होते हैं. छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने इसी सोच के साथ प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी. डिजिटलीकरण और ई-गवर्नेंस में सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने से मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है, कर चोरी की संभावनाएं घटीं हैं, शासकीय प्रक्रियाएं तेज और पारदर्शी बनीं हैं, भूमि पंजीयन, खनिज रॉयल्टी, परिवहन कर और जीएसटी अनुपालन जैसी व्यवस्थाओं में तकनीक के उपयोग से राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला.

नियमों के सरलीकरण से हुई आसानी

साय सरकार ने आम जन की समस्या को समझा कि जटिल नियम, व्यवसाय और निवेश के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन सकते हैं. इसलिए लाइसेंस और अनुमति प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, समयबद्ध स्वीकृति प्रणाली लागू की गई इस कदम से न केवल निवेश बढ़ा है बल्कि सरकार को कर और शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त हुआ है.

कर प्रशासन में सुधार से तैयार की गई विश्वास आधारित व्यवस्था

ऐसा महसूस किया गया कि कर प्रशासन को विश्वास आधारित और सहयोगात्मक बनाया जाए तो स्वैच्छिक कर अनुपालन में वृद्धि होती है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी सिद्धांत को अपनाया है. ई-फाइलिंग और ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा, करदाताओं के लिए हेल्पडेस्क और मार्गदर्शन की व्यवस्था बनाई गई है और अनावश्यक छापेमारी से परहेज किया जा रहा है. इन उपायों से करदाताओं में विश्वास बढ़ा है और कर संग्रह में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई.

खनिज और प्राकृतिक संसाधनों का किया जा रहा है संतुलित उपयोग

छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है. राज्य की साय सरकार ने यह स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण उपयोग ही दीर्घकालिक राजस्व का आधार हो सकता है.इसके लिए खनन पट्टों की पारदर्शी नीलामी की जा रही है, रॉयल्टी संग्रह में सख्ती बरती जा रही है और अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है. इन कदमों से सरकार को न सिर्फ़ राजस्व ही मिला बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों की रक्षा भी हुई.

खर्च में बरता जा रहा अनुशासन कमाई से ज्यादा बचत पर ज़ोर

राजस्व वृद्धि के साथ-साथ व्यय नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने गैर-जरूरी योजनाओं की समीक्षा की,प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर फोकस किया, परिणाम आधारित बजटिंग को बढ़ावा दिया. इससे सरकारी खर्च अधिक प्रभावी और लक्ष्य-उन्मुख बना गया है.

जनकल्याण और राजस्व के बीच रखा जा रहा है अदभुत संतुलन

एक प्रचलित धारणा है कि राजस्व बढ़ाने के प्रयासों से जनकल्याण प्रभावित होता है. लेकिन छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने इस मिथक को सफलतापूर्वक तोड़ने का काम है.साय सरकार की नीतियों में गरीब और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया. कल्याणकारी योजनाओं को वित्तीय अनुशासन के साथ चलाया गया जिसके परिणामस्वरूप, सामाजिक योजनाएं भी मजबूत हुईं और राज्य की आर्थिक सेहत भी सुधरी.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बनी आर्थिक सुशासन की एक नई मिसाल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नेतृत्व इस छत्तीसगढ़ में होने वाले इस पूरे परिवर्तन का केंद्र बिंदु रहा है. उनकी कार्यशैली में स्पष्ट दृष्टि,निर्णय लेने में दृढ़ता और प्रशासन पर मजबूत पकड़.दिखाई देती है. उन्होंने अधिकारियों को उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणामोन्मुख बनने का स्पष्ट संदेश दिया है जिसका असर सीधे वित्तीय प्रबंधन पर पड़ा. वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक सुधार कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं होती. यह निरंतर प्रयास, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक दक्षता का परिणाम होती है.

छत्तीसगढ़ में आज जो राजस्व वृद्धि दिखाई दे रही है वह किसी संयोग का परिणाम नहीं बल्कि सुविचारित नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन की देन है. प्रदेश की साय सरकार ने यह साबित कर दिया है कि यदि शासन का उद्देश्य जनकल्याण के साथ आर्थिक मजबूती हो तो विकास स्वतः ही होने लगता है. आने वाले समय में यही वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक सुधार छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और विकासशील राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने वाला साबित होगा.