Sambalpur Festival 2025 Sahitya Utsav: संबलपुर. संबलपुर महोत्सव-2025 के अवसर पर इसबार मुख्य मंच पर एक अभिनव तरीके से ‘साहित्य उत्सव’ का आयोजन किया गया. संयोजक डॉ. सपन मिश्र ने ‘साहित्य उत्सव’ के बारे में जानकारी दी और मुख्य मंच पर रोचक तरीके से लोगों के सामने साहित्य प्रस्तुत करने के उद्देश्य और मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डाला.
आयोजक मानस सडंगी ने सबसे पहले पश्चिम के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों का मंच पर परिचय कराया. वरिष्ठ शोधकर्ता, साहित्यकार, इतिहासकार डॉ. शाशा के शेखर पंडा, संबलपुर, स्वनामधन्य कवि और गीतकार दुर्गा माधव पंडा, सुंदरगढ़, दर्दी कवि आनंद साहू, बलांगीर, यशस्वी कथाकार बलदेव दीक्षित, ब्रजराजनगर, प्रख्यात कवि क्षीरोद कुअर, झारसुगुड़ा, लेखक-कथाकार तेजरू बारिक, बरगढ़ और नाटककार, अभिनेता, निर्देशक अतिश सतपथी आदि ने पहली बार आधुनिक युग में विश्व साहित्य में संबलपुरी साहित्य के स्थान के बारे में जानकारी दी गई.
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उन्होंने उत्तर-आधुनिकता और प्रगतिशील साहित्य के इस युग में हमारी भाषा में रचे जा रहे साहित्य के विभिन्न प्रमाण प्रस्तुत करते हुए चर्चा को आगे बढ़ाया.
कवि खिरोद कुँअर ने अपनी बहुचर्चित कविता “पहा तलर छाए” सुनाकर दशकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. कथाकार बलदेव दीक्षित ने मूर्तिकला के विस्तार, मूर्तिकला और वर्तमान में हमारे क्षेत्र में मूर्तिकला के कारण उत्पन्न मानवीय संकट पर अपनी बहुचर्चित प्रस्तुति दी. कथाकार तेजरू बारिक ने अपनी शानदार कहानी कहने की कला से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. कवि और गीतकार दुर्गा माधव पंडा ने अपनी भावपूर्ण कविता “जाइछे जे जाइछे…” से सभी का मन मोह लिया.
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तत्पश्चात, कवि आनंद चंद्र साहू ने “लमेइछे पाहा” ने मृत्यु की चेतना और प्रेम व विरह की आंतरिक आवाज को व्यक्त किया.
नाटककार आतिश सतपथी संबलपुरी ने नाटक ‘भूखा’ के दो संवाद सुनाकर हमारे साहित्य की करुणा और आक्रोश का उदाहरण दिया, जिससे नाटक में साहित्य के उच्च स्तर पर प्रकाश डाला गया.
इतिहासकार और लेखक डॉ. शशांक शेखर पंडा ने कई मजबूत तर्क प्रस्तुत किए कि हमारा साहित्य किसी भी भारतीय साहित्य से तुलनीय है. संयोजिक डॉ. सपन मिश्र ने सभी तथ्य प्रस्तुत करके यह सिद्ध किया कि रामायण, महाभारत सहित समस्त आधुनिक साहित्य, व्याकरण, शब्दावली, शब्दकोश और अन्य साहित्य हमारी भाषा में रचा जा रहा है.
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