एमसीबी। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और पूर्व जिला कोरिया से जुड़े ग्राम हरचोका के रेत घाट से संबंधित रॉयल्टी प्रकरण में अब सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए यह सुनिश्चित करने की ठोस पहल की कि सरकारी राजस्व की एक-एक राशि ग्राम पंचायत के खाते में पहुंचे।

मवई नदी स्थित ग्राम हरचोका, तहसील भरतपुर के खसरा नंबर 336, रकबा 5.00 हेक्टेयर के क्षेत्र को वर्ष 2017 के संशोधित आदेश के तहत रेतघाट के रूप में स्वीकृत किया गया था, जहां छत्तीसगढ़ गौण खनिज रेत उत्खनन एवं व्यवसाय विनियमन निर्देश 2006 के प्रावधानों के अनुरूप रेत का उत्खनन और विक्रय किया जाना था।
रेत उत्खनन के बदले ग्राम पंचायत खाते में जमा की जाने वाली रॉयल्टी राशि 20,54,200 रुपये जमा नहीं होने पर यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया और इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लगातार पत्राचार कर जवाब मांगा गया। पूर्व जिला कोरिया के समय से लेकर वर्तमान जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के गठन के बाद तक इस मामले में प्रशासन निरंतर सक्रिय बना रहा।
खनिज शाखा के रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम पंचायत हरचोका के तत्कालीन सरपंच और सचिव को वर्ष 2019 में ही सात दिवस के भीतर राशि जमा करने का नोटिस दिया गया था। बाद में जिला पुनर्गठन के पश्चात मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के कलेक्टर द्वारा एक बार फिर वर्ष 2025 में पत्र एवं स्मरण पत्र जारी कर बकाया राशि के संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा गया। चूंकि मई 2018 से 23 अप्रैल 2019 तक के मासिक पत्रक भी कार्यालय में उपलब्ध नहीं थे, इसलिए मामले को और गंभीरता से लेते हुए संयुक्त जांच समिति गठित की गई। समिति द्वारा परीक्षण के बाद यह अनुशंसा की गई कि कुल 20,54,200 रुपये की रेत रॉयल्टी राशि जमा कराने के लिए विधिवत कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक सक्रियता का सकारात्मक परिणाम सामने आया और ग्राम पंचायत हरचोका के तत्कालीन सरपंच लाल साय द्वारा 14,00,000 रुपये भारतीय स्टेट बैंक शाखा जनकपुर के माध्यम से जमा करा दिए गए।
इसके साथ ही शेष 6,54,200 रुपये तीन माह के भीतर जमा करने का शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया जिससे स्पष्ट है कि अब पूरा प्रकरण समाधान की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और बची हुई राशि भी निर्धारित अवधि में जमा होने की पूरी संभावना है।
कलेक्टर (खनिज शाखा), अनुविभागीय अधिकारी राजस्व भरतपुर तथा संयुक्त जांच समिति के सामूहिक प्रयासों से इस प्रकरण में न केवल रॉयल्टी राशि की वसूली का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि सरकारी राजस्व की सुरक्षा के प्रति प्रशासन की गंभीरता भी स्पष्ट हुई है। इस प्रकरण के माध्यम से यह संदेश गया है कि शासन किसी भी प्रकार के बकाया राजस्व को लेकर उदासीन नहीं है और समय पर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करता है। बड़ी राशि जमा होने से ग्राम पंचायत हरचोका की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। यह मामला अब विवाद और संदेह के दायरे से बाहर निकलकर समाधान और पारदर्शिता के मॉडल के रूप में उभर रहा है।
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