अतीश दीपंकर/भागलपुर। जिले के आनन्दराम ढांढनियां सरस्वती विद्या मंदिर में मां शारदे की प्रतिमा के विधिवत विसर्जन के साथ सरस्वती पूजन सह विद्यारंभ संस्कार उत्सव का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, विद्यार्थी एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

ज्ञान और संस्कार का पर्व

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सुमंत कुमार ने कहा कि मां सरस्वती का पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और विवेक के जागरण का पर्व है। उन्होंने बताया कि सरस्वती पूजन सह विद्यारंभ संस्कार विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को सुदृढ़ करता है।

विद्यारंभ संस्कार का महत्व

प्रधानाचार्य ने कहा कि विद्यारंभ संस्कार बालक के जीवन की वह पवित्र शुरुआत है, जहां से उसके बौद्धिक एवं नैतिक विकास की नींव पड़ती है। यह संस्कार भारतीय शिक्षा परंपरा की आत्मा है, जो बच्चों को केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें सुसंस्कृत एवं जिम्मेदार नागरिक बनाता है।

राष्ट्रहित में ज्ञान के उपयोग का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में मां शारदे की प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर प्रधानाचार्य सुमंत कुमार ने सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का सदुपयोग समाज और राष्ट्रहित में करेंगे तथा अपने आचरण से विद्या की मर्यादा बनाए रखेंगे।