रायपुर। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को यूनिफॉर्म (साड़ी) वितरण को लेकर बड़ा प्रशासनिक उलटफेर सामने आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पहले जहां वर्ष 2024-25 में 500 रुपये प्रति साड़ी की दर से यूनिफॉर्म वितरण की स्वीकृति दी गई थी, वहीं अब उन्हीं साड़ियों की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद नए आदेश में उन्हें वापस मंगाकर बदलने के निर्देश दिए गए हैं।


दरअसल 26 मार्च 2025 को जारी आदेश में आईसीडीएस योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के लिए दो साड़ी यूनिफॉर्म देने का प्रावधान किया गया था। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये की दर तय की गई थी, जिसमें 60 प्रतिशत केंद्रांश (300 रुपये) और 40 प्रतिशत राज्यांश (200 रुपये) शामिल था। अनुमान के मुताबिक करीब 1.94 लाख यूनिफॉर्म की जरूरत बताई गई थी।
हालांकि उस समय ही छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से साड़ियों की दर 718 रुपये से 860 रुपये (जीएसटी सहित) तक बताई गई थी और 500 रुपये में सप्लाई को लेकर असमर्थता जताई गई थी। इसके बावजूद विभाग ने निर्धारित दर पर यूनिफॉर्म वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
अब सामने आई गड़बड़ी
7 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में विभाग ने माना है कि वर्ष 2024-25 में वितरित साड़ियों में कई जगह गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि कुछ साड़ियों की लंबाई कम है, जबकि कई में बुनाई मानक के अनुरूप नहीं है। विभाग के अनुसार इन शिकायतों की जांच राज्य स्तर पर गठित समिति द्वारा की गई, जिसमें गुणवत्ता मानकों में विचलन की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित जिलों में वितरित साड़ियों को बदलने का निर्णय लिया गया है।
जिलों को सख्त निर्देश
नए आदेश में सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि दोषपूर्ण साड़ियों की संख्या का आकलन करे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं से ऐसी साड़ियां वापस लेते हुए एक सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट संचालालय को भेजा जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन जिलों से समय पर जानकारी नहीं मिलेगी, वहां यह माना जाएगा कि कोई गड़बड़ी नहीं है और बाद में बदलाव की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
फिर खादी बोर्ड को जिम्मेदारी
विभाग ने यह भी तय किया है कि अब साड़ियों की आपूर्ति का जिम्मा फिर से छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को ही दिया जाएगा, ताकि निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जा सके।


क्या है पूरा मामला?
महिला एवं बाल विकास विभाग की साड़ी वितरण योजना के तहत वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश की लगभग 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी वितरित की गई थी। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये की दर से करीब 9.7 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सरकारी मापदंड के अनुसार हर साड़ी की लंबाई 5.5 मीटर होनी थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई। कई जिलों में बांटी गई साड़ियां 5 मीटर या उससे भी कम पाई गईं। इस कमी का सीधा असर उन महिलाओं पर पड़ा, जिन्हें यह साड़ियां पहननी हैं। मामले के सामने आने के बाद प्रदेश में सियासी माहौल भी गरमा गया। कांग्रेस ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि जहां-जहां शिकायतें मिलेंगी, वहां साड़ियों को वापस लेकर बदला जाएगा। उन्होंने खुद साड़ी की गुणवत्ता जांचने की बात भी कही थी।
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