बॉम्बे हाईकोर्ट ने सड़कों पर अतिक्रमण रोकने में लापरवाही के लिए BMC को कड़ी फटकार लगाई है। पवई के एक स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र घुघे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं करना गंभीर चिंता का विषय है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कमिश्नर को भी ‘घोड़े पर’ दफ्तर आना पड़ सकता है। अदालत ने BMC से कहा कि वह अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठाए और जल्द से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करे।
पवई के एक स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र घुघे और जस्टिस अभय मंत्री ने हीरानंदानी इलाके की करीब 90 फीट चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण की तस्वीरें देखी और नाराजगी जाहिर की। खबर है कि इस सड़क के फुटपाथ पर कई झुग्गियां बन गई हैं, जिससे स्कूली छात्रों और आम जनता को भारी परेशानी हो रही है। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कमिश्नर को भी ‘घोड़े पर’ दफ्तर आना पड़ सकता है।
अदालत में जस्टिस घुघे ने कहा, “देखा जाए तो इस सड़क से चार कारें एक साथ गुजर सकती हैं, लेकिन अब देखिए क्या हाल हो गया है… यह घटकर सिर्फ एक लेन की रह गई है। मुझे तो यह सोचकर हैरानी होती है कि आने वाले सालों में क्या होगा… लोगों को मोटरसाइकिल छोड़नी पड़ेगी और साइकिल अपनानी होगी… या फिर सबसे अच्छा विकल्प घोड़ा है… घोड़ा भीड़-भाड़ में भी अच्छी तरह रास्ता निकाल लेता है। कल्पना कीजिए कि आपके (BMC के) कमिश्नर घोड़े पर बैठकर अपने ऑफिस आ रहे हैं, तो वह कैसे लगेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “मुंबई को आखिर क्या होता जा रहा है? जैसे ही कोई सड़क बनती है, लोग वहां आकर कब्जा जमा लेते हैं… देखिए आप अपने ही शहर का क्या हाल कर रहे हैं। इतनी खूबसूरत सड़क है और आपने इसका क्या बना दिया है? हम नगर निगम के प्रमुख (कमिश्नर) या किसी भी अन्य अधिकारी को कोर्ट बुला सकते हैं और उनसे इस पर जवाब मांग सकते हैं।”
ऐक्शन नहीं लेने के आरोप
स्कूल की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट नौशाद इंजीनियर पेश हुए। उन्होंने बताया कि अवैध अतिक्रमण को लेकर BMC अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं और कई बैठकें भी की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में यह भी कहा गया कि सिविक अथॉरिटीज ऐसे अतिक्रमण को टैंकर से पानी सप्लाई और टॉयलेट की सुविधा देकर बढ़ावा दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि क्षेत्र में चार स्कूल हैं, जिससे माता-पिता अपने बच्चों को छोड़ने और लेने आते हैं। इसके कारण वाहनों का आवागमन अधिक होता है और अतिक्रमण की वजह से ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है।
क्या बोला कोर्ट
हाईकोर्ट ने BMC की तरफ से पेश वकील को निर्देशों के लिए समय दिया है और कार्रवाई की जानकारी अदालत को देने का आदेश भी दिया है। अदालत ने कहा कि जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाया जाए और सड़क को सामान्य रूप से खुला सुनिश्चित किया जाए।
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