अनिल मालवीय, इछावर। सीहोर में स्थित कुबेरेश्वर धाम पर आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा की शुरुआत सुमधुर भजन “कर्म तुम्हारा जरूर होगा” और गुरु वंदना के साथ हुई। व्यासपीठ से अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भक्तों को संबोधित करते हुए शिवतत्व की गहन व्याख्या की और जीवन जीने की कला सिखाई।

प्रमुख अतिथि और स्वागत समारोह

कथा के तीसरे दिन राजनीति और धर्म क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सीहोर जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर का स्वागत किया गया। मंत्री कैलाश ने पंडित मिश्रा की सेवा कार्यों (अस्पताल, भोजनालय) की सराहना करते हुए कहा कि पहले सीहोर अपनी कचौरी के लिए प्रसिद्ध था लेकिन आज पंडित जी की भक्ति के कारण वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है। इसके साथ ही खाटूश्याम के प्रतिनिधि, सनातन धर्म का प्रचार करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अखंड हिंद फौज का भी शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया।

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भाग्य को बदलने की शक्ति केवल महाकाल बाबा में

पंडित प्रदीप मिश्रा ने “ॐ नमः शिवाय” के जाप के साथ शिव महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शिव कहीं बाहर नहीं, बल्कि हर कंकड़ और मनुष्य की हर रोमावली में निवास करते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि दूसरे बाबाओं के पैर छूने से पहले एक बार स्वयं के पैर छुओ, क्योंकि तुम्हारे भीतर भी शिव का अंश है। भाग्य लिखना विधाता का काम है, लेकिन उस भाग्य को बदलने की शक्ति केवल महाकाल बाबा में है।

ईश्वर से नाता दिखावे का नहीं होना चाहिए

उन्होंने कहा कि ईश्वर से नाता मन का होना चाहिए, दिखावे का नहीं। कथा के दौरान एक मर्मस्पर्शी पत्र पढ़ा गया, जिसमें एक महिला ने बताया कि डॉक्टरों के मना करने के बाद भी कुबेरेश्वर धाम की मिट्टी और एक लोटा जल के विश्वास से उन्हें 20 साल बाद संतान सुख प्राप्त हुआ। पंडित जी ने इसे “आस्था का चमत्कार” बताया। माता-पिता और गुरु के चरणों में हमेशा बैठना कठिन है, लेकिन उनके बताए मार्ग और शरण में रहना सरल है। जो शिव की शरण में है, उसकी चिंता स्वयं महादेव करते हैं।

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सती चरित्र और शिव-पार्वती विवाह

कथा के प्रसंग में माता सती के बाल्यकाल और उनके दृढ़ निश्चय का वर्णन किया गया। बताया कि कैसे अपमानित होने के बाद भी सती ने पत्थर की मूर्ति में परमात्मा को प्रकट कर लिया और शिव को वर के रूप में चुना। उन्होंने कहा कि हमारा सनातन धर्म पत्थर में भी परमात्मा प्रकट करने की सामर्थ्य रखता है। प्रकृति संरक्षण के लिए वृक्षारोपण करने वालों को धन्यवाद दिया और गौ-सेवा व 351 कमरों की निर्माणाधीन धर्मशाला में सहयोग की अपील की। उन्होंने भक्तों से भीषण गर्मी को देखते हुए बार-बार पानी पीते रहने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने का विशेष आग्रह किया।

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