दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक अहम फैसले में कहा है कि एक ही कथित अपराध के लिए दो अलग-अलग देशों में समानांतर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक महिला द्वारा अमेरिका में तलाक लेने के बाद दिल्ली में दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया गया था। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया और कहा कि एक ही घटनाक्रम को आधार बनाकर अलग-अलग न्यायिक मंचों पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

जस्टिस Neena Bansal Krishna की बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक ही कथित अपराध के लिए दो अलग-अलग देशों में कानूनी प्रक्रिया शुरू करना कानून का दुरुपयोग है। मामला एक महिला से जुड़ा था, जो अमेरिका में अपने पति से तलाक ले चुकी थी और समझौते के तहत तय रकम भी प्राप्त कर चुकी थी। इसके बाद भारत लौटने पर उसने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया।

बेंच ने कहा कि महिला अपने पति के साथ विदेश में रह रही थी और यदि घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना जैसा कोई अपराध हुआ होगा तो वह वहीं हुआ होगा। महिला ने विदेश में ही इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की, जिसके तहत पति-पत्नी के बीच समझौता हुआ और सहमति से तलाक हो गया।

अमेरिकी अदालत में किए गए दावे से फंसी महिला

सुनवाई के दौरान पति की ओर से हाईकोर्ट के समक्ष वह दस्तावेज पेश किया गया, जिसमें महिला ने अमेरिकी अदालत में तलाक की कार्यवाही के दौरान कहा था कि पति-पत्नी के बीच सभी विवाद सुलझ चुके हैं। अदालत ने इस दस्तावेज को महत्वपूर्ण माना।

बेंच ने टिप्पणी की कि जब पक्षकार विदेशी अदालत में विवादों के पूर्ण समाधान का बयान देकर समझौते के आधार पर तलाक ले चुके हैं और तय राशि भी स्वीकार कर ली गई है, तो उन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर भारत में आपराधिक कार्यवाही शुरू करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक विवादों का निपटारा हो जाने के बाद उन्हें आपराधिक मुकदमे के माध्यम से पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न का मामला रद्द कर दिया गया।

दोनों का 2017 में दिल्ली में हुआ था विवाह

महिला का विवाह जुलाई 2017 में दिल्ली में हुआ था। शादी के बाद वह अपने पति के साथ अमेरिका चली गई। करीब दो साल बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। 17 मई 2019 को पति ने अमेरिकी अदालत में तलाक की याचिका दायर की। इसके दस दिन बाद, 27 मई 2019 को महिला ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिका में घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद अमेरिकी पुलिस ने पति को पीड़ित माना और पत्नी को आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया। हालांकि, पति द्वारा कोई औपचारिक आरोप न लगाए जाने के कारण उसे रिहा कर दिया गया।

महिला ने दूसरी बार भी घरेलू हिंसा की शिकायत दी, लेकिन वह आरोप साबित नहीं कर सकी। इसी बीच अगस्त 2019 में उसने दिल्ली में भी घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करा दी। जनवरी 2020 में अमेरिका में पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से तलाक हो गया। समझौते के तहत भरण-पोषण और अन्य वैवाहिक दावों के बदले एकमुश्त राशि का भुगतान भी किया गया।

1 साल बाद दर्ज कराया मुकदमा

अमेरिका में आपसी सहमति से तलाक और समझौते के बाद भी भारत में दर्ज कराए गए आपराधिक मुकदमे पर Delhi High Court ने सख्त टिप्पणी की है। पत्नी ने दिसंबर 2020 में दिल्ली में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों को आरोपी बनाया गया। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जस्टिस Neena Bansal Krishna की बेंच ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि कोई भी पक्ष एक ही समय में वैवाहिक समझौते का लाभ ले और दूसरी ओर उसी कथित कारण या घटनाक्रम के आधार पर आपराधिक कार्रवाई जारी रखे यह कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब पति-पत्नी के बीच विवादों का निपटारा हो चुका है और समझौते के तहत तलाक भी हो गया है, तो उन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।

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