Bihar News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक तरफ बिहार यात्रा पर निकलने वाले हैं। दूसरी तरफ गयाजी में उनकी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। दरअसल पार्टी के दिग्गज नेता और प्रदेश सचिव डॉ. चंदन यादव समेत कई पुराने कार्यकर्ताओं ने अचानक एक साथ अपना इस्तीफा दे दिया है। पार्टी से इस्तीफा देने के पीछे डॉ. चंदन यादव और कार्यकर्ताओं ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जदयू में अब कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दी जाती है। हमेशा उन्हें उपेक्षित रखा जाता है।

डॉ. चंदन यादव ने प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को भेजे गए अपने त्यागपत्र में पार्टी के अंदर सक्रिय कुछ नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अब पार्टी मुख्यालय में बैठे कुछ मठाधीशों की चापलूसी करना अनिवार्य हो गया है और जो लोग उनकी परिक्रमा करते हैं, उन्हें ही संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दशकों से पार्टी के लिए खून-पसीना बहाने वाले समर्पित साथियों को अब जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है।

उनके अनुसार पार्टी में कुछ मुट्ठी भर स्वयंभू नेता अपने करीबी लोगों को संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर स्थापित कर रहे हैं, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान डॉ. चंदन यादव ने कहा कि, उन्होंने छात्र जीवन से ही नीतीश कुमार की विचारधारा को सींचने का काम किया है। उन्होंने उस दौर का जिक्र किया जब बिहार में राजद के बाहुबलियों का खौफ चरम पर था और कार्यकर्ता सड़कों पर निकलने से डरते थे, तब उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना जदयू का झंडा बुलंद किया था। उनके अनुसार, आज पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है और पुराने कार्यकर्ताओं की कोई उपयोगिता नहीं बची है।

इस्तीफा देने के बाद डॉ. चंदन ने एक बड़ा दावा करते हुए पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह तो केवल एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में पटना में कई अन्य बड़े नेता भी जदयू को अलविदा कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि लाखों समर्पित कार्यकर्ताओं को आज यह महसूस कराया जा रहा है कि पार्टी में उनकी मेहनत का कोई मोल नहीं है। डॉ. चंदन यादव का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब जदयू शीर्ष नेतृत्व संगठन को नए सिरे से मजबूत करने का दावा कर रहा है।

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