अमित पांडेय, खैरागढ़. छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. नाट्य विभाग के HOD डॉ. योगेंद्र चौबे के खिलाफ SC छात्रा ने 2 साल पहले महिला आयोग में यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर फरवरी 2025 में पुलिस ने संज्ञान लिया और 30 मार्च को आरोपी प्रोफेसर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया. इस मामले में आरोपी के समर्थक उसे बचाने के लिए सोशल मीडिया में प्रशासनिक षडयंत्र साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं पीड़ित SC समाज ने बैठक कर फैसला लिया है कि अगर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

आरोपी के समर्थक बचाने की कैसी कोशिश कर रहे ?

दरअसल, मामला छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न का है, लेकिन आरोपी के समर्थकों ने उसे बचाने के लिए इसे प्रशासनिक षडयंत्र साबित करने की कोशिश में जुटे हैं. वे हाल ही में 21 मार्च को हुए Octave Fest के अवसर पर राज्यपाल के प्रवास में हुई व्यवस्था में गड़बड़ी को इस मामले से जोड़कर कलेक्टर पर षडयंत्र पूर्वक नाट्य विभागाध्यक्ष डॉ. योगेन्द्र चौबे के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगा रहे हैं.

दरअसल, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में ऑक्टेव फेस्टिवल के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका का खैरागढ़ प्रवास हुआ था. इस दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन की व्यवस्थाओं में लापरवाही को लेकर कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई थी. इसी कार्यक्रम में डॉ. योगेंद्र चौबे भी मौजूद थे. हालांकि, बाद में कलेक्टर और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बैठक के जरिए मामला आपस में गले मिल कर सुलझा लिया गया. लेकिन 24 मार्च को डॉ. योगेंद्र चौबे ने कुलपति को कलेक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत दी. जो पत्रर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर विरोध शुरू हो गया.

यौन उत्पीड़न के लंबित मामले में हुई गिरफ्तारी : पुलिस

HOD की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने बताया कि उन्हें यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार किया गया है, जो कि पहले से ही लंबित था. राष्ट्रीय महिला आयोग से 24 फरवरी को ही इसकी जांच के निर्देश मिले थे. पीड़िता की खराब तबीयत के कारण बयान दर्ज होने में देरी हुई, जिसके चलते एफआईआर दर्ज करने में भी विलंब हुआ.

देंखें कलेक्टर के खिलाफ शिकायत पत्र की कॉपी:

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता ने 2018-19 में विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग में प्रवेश लिया था. विभागाध्यक्ष डॉ. योगेंद्र चौबे के अधीन पढ़ाई के दौरान कोरोना महामारी के कारण कक्षाएं ऑनलाइन हो गईं. इस दौरान पीड़िता की मां का निधन हो गया और उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. जब 2022-23 में उसने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए विश्वविद्यालय से संपर्क किया और फीस में छूट की मांग की, तो डॉ. चौबे ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश की. पीड़िता के मुताबिक, डॉ. चौबे ने पीड़िता की फीस भरने के बदले उसके साथ रात बिताने की शर्त रखी. जब पीड़िता ने इसकी शिकायत तत्कालीन कुलपति और कुलसचिव से की, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसके उलट, डॉ. चौबे और उनके समर्थकों ने उसे धमकाया कि यदि उसने शिकायत वापस नहीं ली तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. मानसिक रूप से परेशान होकर पीड़िता इलाज के लिए दिल्ली चली गई. लेकिन वहां भी डॉ. चौबे ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे लगातार अश्लील संदेश और वीडियो भेजता रहा.

3 बार शिकायत के बाद भी विश्वविद्यालय ने नहीं की कार्रवाई

पीड़िता ने 10 अगस्त, 29 अगस्त और 12 सितंबर 2023 को तीन बार लिखित शिकायत तत्कालीन कुलपति ममता चंद्राकर को दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद, जब उसने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अपनी शिकायत की स्थिति जाननी चाही, तो तत्कालीन कुलसचिव नीता गहरवार ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि वह अब विश्वविद्यालय की छात्रा नहीं है, इसलिये उसे जानकारी नहीं दी जाएगी. थक हारकर, पीड़िता ने 6 अक्टूबर 2023 को राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई. आयोग ने 24 फरवरी 2025 को खैरागढ़ पुलिस अधीक्षक को जांच के आदेश दिए. पुलिस ने विस्तृत जांच के बाद आरोपी डॉ. योगेंद्र चौबे के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए, जिसके बाद 29 मार्च को एफआईआर दर्ज कर 30 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) आशा रानी ने बताया कि पीड़िता ने यह शिकायत 2023 में ऑनलाइन दर्ज कराई थी, जिसकी जानकारी खैरागढ़ पुलिस को हाल ही में 24 फरवरी 2025 को राष्ट्रीय महिला आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर हुई. चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग से संबंधित है और मामले में जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया था, इसलिए एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं.

10 साल में 3 यौन उत्पीड़न के मामले

पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय में अनुशासनहीनता बढ़ी है. इससे पहले, डिजाइनिंग विभाग के वेंकट रमन गुडे के खिलाफ भी इसी तरह का मामला दर्ज किया गया था, जो अभी न्यायालय में विचाराधीन है. कुछ दिन पहले ओडीसी विभाग के एक प्रोफेसर पर अश्लील वीडियो बनाने का आरोप लगा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. बीते 10 वर्षों में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं. इन मामलों की सच्चाई न्यायालय के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.

पीड़ित समाज करेगा प्रदर्शन

सोशल मीडिया पर आरोपी के समर्थन में उठ रही आवाजों और मामले को दबाने की कोशिशों के बीच जिला SC समाज आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है. अब देखना यह होगा कि शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाले आरोपी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है.

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