रायपुर. श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल ने एक बार फिर अब तक केवल राज्य के बाहर हो रही जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न कर अपनी गुणवत्ता को साबित किया है. अपने आदर्श वाक्य ‘Say No To Child Blindness’ के अनुरूप कार्य करते हुए उपचार का खर्च वहन करने में असमर्थ बाल रोगियों की जटिल सर्जरी कर उन्हें अंधेपन से बचाया है.

13 वर्षीय राजेंद्र यादव तालाब में नहाने की वजह से होने वाली राइनोस्पोरिडिओसिस बीमारी से लंबे समय जूझ रहे थे, अस्पताल में इलाज के लिए आने पर उनकी वित्तीय स्थितियों को देखते हुए प्रबंधन ने बहुत कम लागत पर जटिल सर्जरी को अंजाम दिया. महासमुंद से 8 साल के आकाश ध्रुव को कॉर्निया खराब होने के कारण कॉर्नियल टियर मिला. समय पर इनका सफल लेंस प्रत्यारोपण करने में मदद की. इसी तरह गरियाबंद के 6 साल के डिकचंद सोरी के दोनों आंखों का लेंस प्रत्यारोपण अस्पताल में किया गया.

इस तरह से डॉक्टरों की समर्पित और अनुभवी युवा टीम की बदौलत SGVEH ने 500 से अधिक बच्चों के मोतियाबिंद को ठीक किया है. माना जाता है कि जन्म दोषों का इलाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन समय पर सही निदान और प्रारंभिक अवस्था में इलाज से दुर्बलताओं में अंतर आ रहा है. दृष्टिदोष, मोतियाबिंद, कॉर्नियल रोग, आघात, और रेटिना रोग बाल आयु में दृष्टि हानि होने वाली बीमारियां हैं, इनमें से कुछ आनुवंशिक और अन्य गैर-आनुवंशिक हैं.

नेत्र सर्जन और निदेशक, श्री गणेश विनायक अस्पताल ने डॉ. चारुदत्त कलामकर ने बताया कि इन बच्चों के पालकों ने अस्पताल में मिल रही सुविधाओं और सेवाओं की जानकारी के बाद संपर्क किया. इनकी जटिल सर्जरी कर नई रोशनी प्रदान की है. रोगी का विश्वास हमें राज्य में चिकित्सा सुविधा के उन्नयन के लिए हमेशा प्रेरित करता है. मरीजों ने भी डॉ. चारुदत्त कलमाकर के साथ डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. विनय जायसवाल और डॉ. सुनील मल्ल का आभार व्यक्त किया.

तीन वर्षों में एक लाख से अधिक ऑपरेशन

श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल में पिछले तीन वर्षों में एक लाख से अधिक मोतियाबिंद सर्जरी हुई है. धमतरी रोड, रायपुर के सामने स्थित 50 बेडेड अस्पताल नवीनतम उपकरणों और नई तकनीकों से सुसज्जित है. डॉ. चारुदत्त कलामकर (एम्स), डॉ. अनिल गुप्ता (शंकर नेत्रालय), डॉ. विनय जायसवाल, और डॉ. सुनील मॉल (एम्स) के मार्गदर्शन में यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है.