अजयारविंद नामदेव, शहडोल। एमपी के शहडोल जिले में सरकारी विभागों पर बिजली बिल का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। करोड़ों रुपये के बकाया ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर कर दिया है कि सरकारी संस्थानों में वित्तीय अनुशासन किस कदर कमजोर हो चुका है। ताजा मामले में 46 शासकीय विभागों और संस्थानों पर कुल 19 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। खास बात यह है कि कई विभागों पर लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का भुगतान लंबित है, जिससे बिजली व्यवस्था और वित्तीय अनुशासन दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानें किन विभागों पर कितना बकाया
शहडोल में सरकारी दफ्तरों और संस्थानों पर बिजली बिल का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 46 शासकीय विभागों और संस्थानों पर कुल 19 करोड़ 77 लाख 7 हजार 900 रुपये का बिजली बिल बकाया है। बकाया सूची में ग्राम पंचायतें सबसे आगे हैं, जिन पर करीब 7 करोड़ 80 लाख 59 हजार 629 रुपये का भारी भरकम बिल बकाया है। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर लगभग 5 करोड़ 66 लाख 28 हजार रुपये का बकाया दर्ज है।
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अधिकांश विभाग समय पर नहीं कर रहे भुगतान
वहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग पर करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपये, और महिला एवं बाल विकास विभाग पर 1 करोड़ 4 लाख 34 हजार रुपये का बकाया है। अन्य विभागों की बात करें तो उच्च शिक्षा विभाग पर लगभग 1 करोड़ 59 लाख 2 हजार रुपये, राजस्व विभाग पर करीब 1 करोड़ 70 लाख 53 हजार रुपये और गृह विभाग पर करीब 13 लाख 38 हजार 90 रुपये का बिजली बिल लंबित है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अधिकांश विभाग समय पर भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
MPEB की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इधर, इस पूरे मामले में एमपीईबी (विद्युत विभाग) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ विभागों का दावा है कि उन्होंने भुगतान कर दिया है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में बकाया दिखाया जा रहा है। इससे न केवल विभागों में असमंजस की स्थिति बन रही है, बल्कि वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
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