मोहित भावसार, शाजापुर। ‘एक पेड़ मां के नाम’ विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान शुरू किया था। यह पहल लोगों को अपनी मां के प्रति सम्मान और प्यार के प्रतीक के रूप में, या उनकी याद में एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करती है। यह कैंपेन धरती माता की रक्षा के लिए नागरिकों की भागीदारी पर केंद्रित है, लेकिन मध्य प्रदेश के शाजापुर में इस अभियान की धरातल पर हकीकत कुछ और ही है…

प्रदेशभर में साल 2025 में जुलाई माह में एक पेड़ मां के नाम अभियान की शुरुआत प्रदेश सरकार ने की। मध्यप्रदेश के शाजापुर में इसके तहत पौधारोपण किया गया। शाजापुर के भैरव डूंगरी में जिला प्रशासन शाजापुर, सांसद व विधायक समेत अकई संगठनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की थी और लगभग एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन यहां पर 151 पौधे लगाएं गए। 151 पौधों लगाने में क्षेत्रीय सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी, शाजापुर विधायक अरुण भीमावद समेत भाजपा पदाधिकारी, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय नागरिक शामिल थे। 151 पौधे भी आज जीवित अवस्था में नहीं है।

अभियान को लगाया पलीता, लाखों का किया खर्चा

जिला मुख्यालय पर 13 जुलाई 2025 को आयोजित एक पेड़ मां के नाम अभियान को बड़े स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने आमजन से इस अभियान के तहत अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान किया था। जिसको लेकर स्थानीय भैरव डूंगरी पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस प्रकार की तैयारी की थी। यह तैयारी किसी शादी की तैयारियों से कम नहीं थी, जिसके चलते लाखों रुपये खर्च किये गए थे।

एक लाख की जगह 151 पौधे लगाए गए, सात महीनों में एक भी नहीं बचा

क लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन केवल 151 पौधे ही लगा पाए। जिनमें 50 पौधे भाजपा पदाधिकारी, 50 पौधे सामाजिक संस्थाओं और 50 पौधे नवयुगल ने लगाए थे, लेकिन सात माह बाद जब मीडिया ने उस जगह का मौका मुआवना किया तो वहां ना तो पौधे मिले ना ही पेड़। वहां सिर्फ पेड़ों के रूप में लकड़िया ही लगी हुई थी। वह भी पूरी तरह से सुख चुकी थी। क्यों कि पौधे रोपे जाने के बाद वहां ना कोई प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने उस जगह का दोबारा निरिक्षण किया न ही किसी जनप्रतिनिधि ने। जिसके चलते पौधे लकड़ियों के रूप तब्दील होकर सुख चुके थे।

अमृत-2 ट्री योजना के तहत रखा जायेगा रखरखाव

इस मामले में जब नगर पालिका अधिकारी भूपेंद्र कुमार दीक्षित से बात की तो उनका कहना था कि पानी की समस्या के चलते पेड़ सुख गए है। नगर पालिका ने उस जगह को अमृत-2 ट्री योजना में लिया है। जिसके चलते समूह की महिलाओं के द्वारा पौधे का रखरखाव किया जाएगा। लेकिन अब सवाल उठता है कि जब प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधिगण केवल 151 रोपे गए पौधे की देखभाल नहीं कर पाए तो अगर एक लाख पौधे लग जाते तो उनका हाल क्या होता ?

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