दुर्गेश राजपूत, ​नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के माखननगर में सोमवार रात स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई। माखननगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक गंभीर घायल को रेफर करने के दौरान इमरजेंसी एंबुलेंस स्टार्ट ही नहीं हुई। आक्रोशित ग्रामीणों ने एंबुलेंस को धक्का मारकर स्टार्ट कराया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और घायल ने दम तोड़ दिया।

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घटना देर रात की है, जब ग्राम माना के पास दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। हादसे में राजेश मालवीय और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तत्काल 108 एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन गाड़ी नहीं पहुंची। परिजन निजी वाहन से घायलों को 10 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए।​ डॉक्टरों ने घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें नर्मदापुरम जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जब परिजनों ने अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस से ले जाने को कहा, तो स्टाफ ने गाड़ी खराब होने का बहाना बनाकर मना कर दिया। इससे ग्रामीण भड़क गए और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। तनाव बढ़ता देख पुलिस बल मौके पर पहुंचा। 

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भारी दबाव के बाद घायलों को एंबुलेंस में रखा गया, लेकिन गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। आखिरकार ग्रामीणों ने खुद धक्का लगाया, तब जाकर एंबुलेंस रवाना हो सकी। इस देरी के बीच घायल राजेश मालवीय की मौत हो गई। ​हैरानी की बात यह है कि खराब पड़ी यह एंबुलेंस विधायक निधि से दान दी गई थी। 108 एंबुलेंस के जिला प्रबंधक ने स्पष्ट किया कि यह वाहन उनके विभाग का नहीं है और इसकी देखरेख की पूरी जिम्मेदारी बीएमओ (BMO) माखननगर की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस एंबुलेंस में कभी डीजल नहीं होता, तो कभी बैटरी खराब रहती है। प्रशासन की इस लापरवाही ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया है।

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