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शारदीय नवरात्रिः मैहर की शारदा शक्ति पीठ के त्रिकूट पर्वत पर गिरा था माई का हार, आज भी ब्रम्ह मुहूर्त में आल्हा के पहले पूजा की मान्यता

वेंकटेश द्विवेदी,सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले के मैहर शक्ति पीठ में नवरात्रि के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जहां सुबह 3 बजे से मां शारदा शक्ति पीठ में श्रृंगार और आरती हुई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 6 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किये गये और 13 सौ पुलिस जवान तैनात है। चाक चौबंद व्यवस्था के बीच 50 हजार से अधिक की संख्या में भक्तों ने दर्शन के लिए सीढ़ियों व रोप-वे से मां के दरबार पहुंचे।

जिले का प्रसिद्ध मैहर की मां शारदा शक्ति पीठ किसी परिचय की मोहताज नहीं है। मान्यता है कि माता सती के गले का हार इसी त्रिकूट पर्वत पर गिरा था जो माई हार के नाम से जाना जाता था जो अपभ्रंश होकर मैहर हो गया। यहां देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु भक्त मां के दरबार हाजिरी लगाते है। कहते है मां किसी भी भक्त को खाली हाथ नहीं लौटती है। यही कारण रहा है कि दरबार में श्रद्धालु भक्तों का तांता लगा रहता है। सभी मां की डेहरी में माथा टेकते है।

किवदंती है कि मां शारदा से अमरता का वरदान प्राप्त भक्त आल्हा प्राचीन काल से लेकर आज भी रोजाना मां की पहली पूजा करते हैं। आज भी ब्रम्ह मुहूर्त में पुजारी द्वारा पट खोलने पर मां का श्रृंगार और मां के चरणों में पूजा के फूल चढ़े हुए मिलते हैं। प्रधान पुजारी देवी प्रसाद पांडेय बताते है कि मैहर वाली मां शारदा की प्रतिमा दसवीं शताब्दी की है। ग्रंथ बताते है कि आकाश मार्ग से भगवान शंकर जब माता सती की अधजली हालात में पार्थिव शरीर लेकर भटक रहे थे तब मैहर के इसी त्रिकूट पर्वत की चोटी में मां के गले का हार गिरा था। मां का हार गिरने से कस्बे का नाम ‘माई हार’ पढ़ गया, और बोलचाल की भाषा मे धीरे धीरे कस्बे का नाम मैहर हो गया।

कहा जाता है पुलिस चौबीसों घंटे मंदिर सुरक्षा और श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु तैनात रहते है। पुजारी बताते है आल्हा आज भी मां के प्रथम दर्शन और पूजा करते है। सुबह मंदिर खोलते ही गर्भ गृह में जलती अगरबत्ती और मां के चरणों में फूल मिलता है, जबकि मां के गर्भ गृह को रोजाना कई तालों में बंद किया जाता है। पैदल सीढ़ी से सड़क वैन और रोपवे से मंदिर तक जाने की सुविधा है। नवरात्रि के सात दिनों तक रोजाना मां अपना रंग और स्वरूप बदलती है।

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