अमेरिका-ईरान तनाव के चलते 2 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई. सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूटकर 80,000 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी 300 अंक गिरकर 24,900 के स्तर पर पहुंच गया. कच्चा तेल 10% उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे एनर्जी और ऑटो सेक्टर पर दबाव बढ़ा. सोना 5,000 रुपये चढ़कर 1.67 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया-यानी निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर भाग रहे हैं.

ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है, अगर बाजार गिर जाए तो निवेशक क्या करें?
- घबराहट में फैसले न लें
बाजार गिरते ही सबसे बड़ी गलती होती है पैनिक सेलिंग. इतिहास बताता है कि हर बड़ी गिरावट के बाद बाजार रिकवर भी हुआ है. अगर आपके निवेश मजबूत कंपनियों में हैं, तो सिर्फ गिरावट देखकर बेच देना समझदारी नहीं.
- पोर्टफोलियो की समीक्षा करें
क्या आपने ज्यादा पैसा हाई-रिस्क सेक्टर में लगाया है?
क्या आपके पास इमरजेंसी फंड है?
क्या आपके निवेश लक्ष्य साफ हैं?
गिरावट के समय पोर्टफोलियो बैलेंस करना समझदारी होती है. डाइवर्सिफिकेशन यानी अलग-अलग सेक्टर में निवेश जोखिम कम करता है.
- SIP जारी रखें, टाइमिंग के चक्कर में न पड़ें
अगर आप म्यूचुअल फंड में SIP कर रहे हैं, तो गिरावट आपके लिए मौका भी हो सकती है. कम दाम पर यूनिट मिलती है. लंबे समय में यही एवरेजिंग फायदा देती है.
- कर्ज लेकर निवेश न करें
मार्केट की अनिश्चितता में लीवरेज (उधार लेकर ट्रेडिंग) सबसे बड़ा जोखिम है. इस समय कैश पोजिशन मजबूत रखना ज्यादा जरूरी है.
- सुरक्षित निवेश का बैलेंस रखें
बाजार में उथल-पुथल के दौरान सोना और डेट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे विकल्प पोर्टफोलियो को स्थिर रखते हैं. लेकिन पूरी रकम एक ही एसेट में लगाना भी सही रणनीति नहीं है.
- मानसिक संतुलन बनाए रखें
हर गिरावट स्थायी नहीं होती. न्यूज और सोशल मीडिया का ओवरलोड टेंशन बढ़ाता है. अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें, अफवाहों पर नहीं.
क्या ये गिरावट लंबी चलेगी?
तेल की कीमतें अगर 100-120 डॉलर तक जाती हैं, तो दबाव और बढ़ सकता है. लेकिन वैश्विक बाजार अक्सर खबरों पर तेजी से रिएक्ट करते हैं और हालात सामान्य होने पर रिकवरी भी उतनी ही तेजी से आती है.
डर नहीं, अनुशासन जरूरी
शेयर बाजार में गिरावट जोखिम का हिस्सा है. समझदारी यही है कि लंबी अवधि की सोच रखें, सही एसेट अलोकेशन करें और भावनाओं में बहकर फैसले न लें. बाजार गिरते हैं, लेकिन टिके रहने वाले निवेशक ही आखिर में जीतते हैं.


