Share Market Down Update: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला. शुरुआती तेजी के बाद बिकवाली का दबाव हावी हो गया और बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी लगातार पांचवें दिन गिरावट के साथ कारोबार करते रहे.

सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब −404.96 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी एक बार फिर 25,800 के नीचे आ गया. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार की धारणा पर दबाव डाला. वैश्विक व्यापार को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण भी निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आए.

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सुबह करीब 11:15 बजे बीएसई सेंसेक्स 271.88 अंक या 0.32 प्रतिशत गिरकर 83,909.08 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 80.25 अंक या 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,796.60 पर था.

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आज बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण

1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) की लगातार बिकवाली से आया. गुरुवार को एफआईआई ने करीब 3,367 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे. वे पिछले चार दिनों से लगातार बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. जनवरी में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 8,017.51 करोड़ रुपये की नेट बिक्री की है.

2. अमेरिकी टैरिफ फैसले से पहले सतर्कता

निवेशक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस अहम फैसले पर नजर बनाए हुए हैं, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ की वैधता से जुड़ा है. अगर कोर्ट इन टैरिफ को अवैध करार देता है, तो अमेरिकी सरकार को आयातकों को करीब 150 अरब डॉलर तक लौटाने पड़ सकते हैं.

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, बाजार की दिशा काफी हद तक इस फैसले पर निर्भर करेगी. अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ जाता है, तो यह भारत जैसे देशों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है, क्योंकि भारत उन देशों में शामिल है जो 50 प्रतिशत टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. हालांकि यह देखना बाकी है कि कोर्ट टैरिफ को आंशिक रूप से कम करता है या पूरी तरह रद्द करता है.

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3. टैरिफ को लेकर नई चिंताएं

पिछले कुछ दिनों से टैरिफ से जुड़ी आशंकाएं एक बार फिर बाजार पर हावी हो गई हैं. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भारत पर कड़े टैरिफ लगाए जा सकते हैं.

इसके अलावा, एक नए प्रतिबंध विधेयक की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है.

इन घटनाओं के चलते पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः करीब 1.8 प्रतिशत और 1.7 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है.

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4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए नकारात्मक साबित हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 0.53 प्रतिशत बढ़कर 62.32 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है. भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए ऊंची तेल कीमतें महंगाई और चालू खाता घाटे का खतरा बढ़ाती हैं, जिसका सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ता है.

5. कमजोर होता रुपया

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया भी दबाव में नजर आया और डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 89.97 पर पहुंच गया. विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाए रखा.

फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता और कमजोर घरेलू शेयर बाजार के चलते विदेशी निवेशक सतर्क बने हुए हैं, जिससे रुपये पर दबाव बना हुआ है.

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तकनीकी विशेषज्ञों की राय

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील के मुताबिक, निफ्टी ने कई अहम तकनीकी सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं, जिससे बाजार में कमजोरी और बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि निफ्टी अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे आ गया है, जो फिलहाल करीब 25,911 पर है.

इसके अलावा, डेली चार्ट पर 25,878 का पिछला सपोर्ट लेवल भी टूट चुका है. अब अगला मजबूत सपोर्ट 25,700 के आसपास दिखाई देता है, जो दिसंबर 2025 के निचले स्तर के पास है. वहीं ऊपर की ओर 26,000 से 26,050 का स्तर बाजार के लिए मजबूत रेजिस्टेंस साबित हो सकता है.

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