Shia Muslim Protest In Kargil Support Iran Khamenei Government: ईरान में इस्लामिक शासन को खत्म करनमे और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई (Ali Khamenei) को हटाने की मांग को लेकर पिछले 21 दिन से ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हिंसा और सरकार की कार्रवाई की में अबतक 3500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं ईरान और उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के समर्थन में करगिल में शिया मुसलमानों ने रैली निकाली। इमाम खुमैनी मेमोरियल ट्रस्ट के बैनर तले ये रैली निकाली गई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने रुहोल्लाह खुमैनी और खामेनेई की प्रशंसा में बैनर लहराए और फारसी और उर्दू में नारे लगाते हुए अमेरिका मुर्दाबाद और इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगाए। कई महिलाओं ने सभा को संबोधित किया। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और गुरुवार को भी कुछ इलाकों में हुए।
कश्मीर के पूर्व में पूर्वी लद्दाख का करगिल जिला शिया बहुल है। यह इलाका पीओके से सटा हुआ है। कई स्थानों पर भारी भीड़ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में और अमेरिका एवं इज़राइल की निंदा करने के लिए एकत्रित हुई। इमाम खुमैनी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस रैली का नेतृत्व अध्यक्ष शेख सादिक रजाई ने किया, जिन्होंने वाशिंगटन और तेल अवीव पर क्षेत्र पर प्रभुत्व जमाने और ईरान को अस्थिर करने का आरोप लगाया।
लखनऊ से भी मिला समर्थन
लखनऊ के एक प्रमुख धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया है और अशांति पैदा कर दी है। उन्होंने कहा, कि परमाणु हथियारों के लिए यूरेनियम संवर्धन के आरोपों पर पश्चिमी शक्तियों ने एक शिया देश पर प्रतिबंध लगा दिए। लेकिन असल में, वे ईरान का तेल चाहते हैं… प्रतिबंध हटाओ, और ईरान समृद्ध होगा। उन्होंने नई दिल्ली से तटस्थ रहने के बजाय तेहरान का समर्थन करने का आग्रह किया। वहीं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना यासूब अब्बास ने अमेरिका और इज़राइल पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया और बड़े पैमाने पर हताहतों की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान में जीवन सामान्य है। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और लखनऊ के शाही इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि युद्ध कोई समाधान नहीं है और उन्होंने ईरान की संप्रभुता और भारत के साथ ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने का आह्वान किया।
ईरान के लोग ही खामनेई के खिलाफ तो भारत में समर्थन में रैली क्यों?
बता दें कि ईरान में इस्लामिक शासन को खत्म करनमे और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई (Ali Khamenei) को हटाने की मांग को लेकर पिछले 21 दिन से ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 2,400 से 2,417 मौतें और 18,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। यह स्पष्ट विरोधाभास इस बात को उजागर करता है कि जहां एक ओर कारगिल की आबादी तेहरान के नेतृत्व के समर्थन में एकजुट हो रही है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप जैसे व्यक्तियों के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच कई ईरानी स्वयं इस शासन को अस्वीकार कर रहे हैं।
कारगिल में ईरान समर्थक शासन के प्रति एकजुटता के कारण
1979 के बाद कारगिल के धर्मगुरुओं ने ईरानी मदरसों में अध्ययन किया। क्रांतिकारी विचारधारा को स्थानीय स्तर पर स्थापित करने के लिए 1989 में इमाम खुमैनी मेमोरियल ट्रस्ट (IKMT) की स्थापना की गई। ईरान के सर्वोच्च नेता को कई शिया समुदायों द्वारा आदर्श (अनुकरण का स्रोत) माना जाता है। जनवरी 2026 में IKMT द्वारा आयोजित रैलियां स्पष्ट रूप से अमेरिका और इजराइल विरोधी थीं, जिनमें हजारों लोग खामेनेई के चित्र लिए हुए थे।
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