दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सड़क हादसों में जान गंवाने वाले आधे से अधिक पैदल लोगों का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब है कि इन मौतों के कारण और परिस्थितियों के बारे में जानकारी नहीं हो पाई है। पुलिस ने माना है कि यह रिकॉर्डिंग और डेटा संग्रह की गंभीर कमी को दर्शाता है, जिससे पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाना मुश्किल हो रहा है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में कुल 649 पैदल यात्रियों की सड़क हादसों में मौत हुई।
इनमें से 330 मौतों (50.8%) में दुर्घटना का कारण पता नहीं चला।
92 मौतें निजी कारों की वजह से हुईं।
75 मौतें दोपहिया वाहनों के कारण हुईं।
43 हादसों में भारी वाहन या माल ढोने वाली गाड़ियां शामिल थीं।
25 मौतें टेम्पो (छोटे मालवाहक वाहन) से हुईं।
16 मौतें ई-रिक्शा के कारण हुईं।
15 मौतें बसों के कारण हुईं।
बाकी 33 मौतें ऑटो और अन्य वाहनों के कारण हुईं।
पुलिस का कहना है कि आधे से ज्यादा मामलों में कारण अज्ञात होने के चलते पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और प्रभावी रोड सेफ्टी उपाय लागू करने में चुनौती बनी हुई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के पिछले चार वर्षों के आंकड़े दर्शाते हैं कि पैदल यात्रियों की मौत लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है और कई मामलों में कारण अज्ञात है।
पैदल यात्रियों की मौत (वर्षवार)
2022: 629 मौतें (358 का कारण अज्ञात)
2023: 622 मौतें (343 का कारण अज्ञात)
2024: 584 मौतें (309 का कारण अज्ञात)
2025: 649 मौतें (330 का कारण अज्ञात)
कुल सड़क हादसे और मौतें
2025 में कुल 1,578 सड़क दुर्घटनाएं हुईं।
2025 में कुल 1,617 मौतें हुईं, जिनमें से लगभग 40% पैदल यात्रियों की थीं।
2024 में 1,504 हादसों में 1,551 मौतें हुई थीं। इसका मतलब है कि 2025 में मौतों की संख्या में 4.26% की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के ताजा आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में सड़क हादसों और मौतों की संख्या लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है। पैदल यात्रियों की मौतों का बड़ा हिस्सा रात के समय और तेज रफ्तार वाली सड़कों पर होता है।
दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का आंकड़ा (2022–2025)
साल कुल सड़क दुर्घटनाएं कुल मौतें
2025 1,578 1,617
2024 1,504 1,551
2023 1,432 1,457
2022 1,428 1,461
पैदल यात्रियों की मौत (2022–2025)
2022: 629 मौतें (358 का कारण अज्ञात)
2023: 622 मौतें (343 का कारण अज्ञात)
2024: 584 मौतें (309 का कारण अज्ञात)
2025: 649 मौतें (330 का कारण अज्ञात)
2025 में सड़क हादसों में हुई कुल मौतों में लगभग 40% पैदल यात्रियों की थी। 2024 के मुकाबले 2025 में सड़क हादसों में मौतों की संख्या में 4.26% की बढ़ोतरी हुई है। आधे से अधिक पैदल यात्रियों की मौतों का कारण अज्ञात होना सड़क सुरक्षा और पैदल यात्री सुरक्षा उपायों की कार्यवाही में चुनौती बना हुआ है।
तो गलती पैदल चलने वालों की भी है..
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा है कि जेबरा क्रॉसिंग, फुटओवरब्रिज और सबवे होने के बावजूद, ज्यादातर लोग इनका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करते। वे सड़कें उस जगह से पार करते हैं जहां चलना सुरक्षित नहीं है। पुलिस ने चेतावनी दी कि ऐसा करने से न केवल स्वयं की जान जोखिम में आती है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।
पुलिस ने आगे कहा “पैदल यात्रियों की ज्यादातर मौतें रात के समय और नेशनल हाईवे, रिंग रोड और आउटर रिंग रोड जैसी तेज रफ्तार वाली सड़कें पर होती हैं। हम नियमित रूप से सड़क सुरक्षा अभियान चलाते हैं ताकि पैदल यात्रियों की सुरक्षा के महत्व को समझाया जा सके और यह संदेश दिया जा सके कि सड़कें सभी के लिए सुरक्षित होनी चाहिए, खासकर पैदल चलने वालों के लिए।”
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और अन्य संबंधित पक्षों द्वारा उठाए गए कुछ कदमों से शहर में सड़क हादसों में पैदल यात्रियों की मौतों को कम किया जा सकता है। अर्बन मोबिलिटी एक्सपर्ट और राहगीरी फाउंडेशन की को-फाउंडर सारिका पांडा भट्ट ने कहा “दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में पर्याप्त फंड और जगह उपलब्ध है। लेकिन प्लानिंग के मामले में पैदल चलने वालों को सबसे नीचे रखा जाता है। कारों के लिए सड़कें चौड़ी की जाती हैं, तेज रफ्तार के लिए फ्लाईओवर बनाए जाते हैं, लेकिन पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि सड़क पर उनकी संख्या सबसे ज्यादा होती है। हरियाली और बैठने की जगह के साथ एक अच्छी तरह से डिजाइन किया गया फुटपाथ न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि पैदल चलने को बढ़ावा देता है और प्रदूषण भी कम करता है।”
IIT दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर (TRIP Centre) की ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञ गीतम तिवारी ने कहा “शहरी इलाकों में वाहनों की रफ्तार कम करने से पैदल यात्रियों की मौतों को आधा किया जा सकता है। आप रिहायशी इलाकों या स्कूलों के पास 60 किमी/घंटा की रफ्तार की अनुमति नहीं दे सकते। अगर हम चौराहों को दोबारा डिजाइन करें, उनके कोनों (corner radii) को कम करें और क्रॉसिंग पर पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दें, तो सुरक्षा में भारी सुधार होगा।”
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