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बिलासपुर। देश के सुप्रसिद्ध, लेखक, कवि और साहित्यकार स्व. श्रीकांत वर्मा के पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेसियों ने उन्हें नम आंखों से याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की. स्व. श्रीकांत वर्मा की याद में बिलासपुर शहर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें देश भर के मशहूर कवियों और साहित्यकारों ने शोधपीठ और यादें श्रीकांत कार्यक्रम में शिरकत किया. इस कार्यक्रम में पहली बार वर्मा फैमली से पुत्रवधु एंका वर्मा शामिल होने पहुंची. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त डॉ. संजय अलंग, अध्यक्षता एंका वर्मा, विशिष्ट अतिथि महापौर रामशरण यादव समेत अन्य मंच पर मौजूद रहे.

एंका वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा, कि बिलासपुर मेरे ससुर स्व. श्रीकांत वर्मा का पैतृक शहर है. उन्हें इस दुनिया को छोड़े 36 साल हो गए है. आज हम उनकी कविता की यादों को ताजा करने आए हैं. अब उनकी संस्था छत्तीसगढ़ में भी काम करेगी. उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को मीठी बताते हुए प्रदेश और बिलासपुर वासियों को मिलनसार बताया.

ढाई दिन के प्रवास पर पहुंची है शहर

बता दें कि छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में ढाई दिनों के प्रवास पर विदेशी महिला, भारतीय बहू एंका वर्मा पहली बार शहर पहुंची. इस दौरान उन्होंने वर्मा फैमली, स्व. श्रीकांत वर्मा फैंस ग्रुप, परिवारिक सदस्यों और चितपरिचित लोगों से मुलाकात कर अपने स्व. ससुर के जीवन और उनके बिलासपुर शहर और राजनीति में दिए गए योगदान की जानकारियां ली. उनके जीवंत को वर्तमान में जीवित रखने के लिए सभी का दिल से शुक्रिया अदा किया.

जयंती के अवसर पर फिर शामिल होगा वर्मा परिवार

एंका वर्मा ने बिलासपुर प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मेरे ससुर स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा एक साहित्यकार, कवि, लेखक, राजनीतिज्ञ जैसे बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे. उनके निधन को आज 36 बरस पूरे हो चुके हैं. इसके बाद भी बिलासपुर वासियों ने उन्हें अपनी यादों में हमेशा के लिए जीवित रखा है. यह देखकर मैं अभिभूत हो चुकी हूं. आने वाले 18 सितंबर को स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा की धर्मपत्नी वीणा वर्मा, पुत्र अभिषेक वर्मा और मैं पुत्रवधू एंका वर्मा जयंती के अवसर पर शामिल होंगे.

प्रकाशित की जाएंगी किताबें

इस प्रवास के दौरान विनोद भारद्वाज, नरेश सक्सेना और सीता सोंथालिया आदियों से जानकारियां और अच्छी-अच्छी कहानियां मुझे जानने-सुनने को मिली. इन्हें जानकर मैं मंत्रमुग्द हो चुकी हूं. इस बाबत वर्मा फैमली ने बुक्स प्रिटिंग के लिए आमेजान से अनुबंध किया है. वर्मा फैमिली आमेजान के जरिए इन कहानियों और किताबों को दोबारा अच्छे ढंग से प्रकाशित कराएंगे. इन किताबों को युवा पीढ़ियों के पढ़ने, सीखने और ज्ञान के लिए अधिक से अधिक यूनिवर्सिटीयों में डोनेट करेंगे और सर्वाधिक लाइब्रेरियों में भी रखेंगे. ताकि श्रीकांत वर्मा की स्मृतियों को 100 साल बाद भी याद रखा जा सके.

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