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आलोक श्रीवास्तव, शाजापुर। जिले के रनायल निवासी भारतीय सेना में पदस्थ सैनिक मोरसिंह धनगर का रविवार को गृह ग्राम में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। गायत्री परिवार के सदस्यों ने पवित्र मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार करवाया. शहीद जवान का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर भोपाल से रनायल सड़क मार्ग से लाया गया. पूरे रास्ते में देशभक्ति के गीत एवं सैनिक के सम्मान में जयकारे लगे. कालापीपल विधायक कुणाल चौधरी भोपाल से ही सैनिक के पार्थिव शरीर के साथ पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों ने जवान को श्रद्धांजलि दी. भारत माता की जय. शहीद मोरसिंह अमर रहे, जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा.

सैनिक सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
शहीद जवान मोरसिंह का अंतिम संस्कार गृह ग्राम रनायल के मुक्तिधाम में सैनिक सम्मान के साथ किया गया. सैनिक के भाई ने मुखाग्नि दी. मातमी धुन के बाद शस्त्र उल्टा कर सेना के जवानों ने अंतिम सलामी दी.

सेना वाहन खाई में गिर गया
मोरसिंह धनगर अरुणाचल प्रदेश में आर्मी में सैनिक थे और सेना के कार्य से जा रहे थे। वे सड़क हादसे के शिकार हो गए। इस हादसे में दो जवानों की मौत हो गई। दोनों जवान सेना के वाहन से जा रहे थे तभी वाहन खाई में गिर गया। हादसे में कालापीपल के रनायल गांव के निवासी मोरसिंह की भी मौत हो गई। शहीद मोरसिंह 4 वर्ष पूर्व ही सेना में भर्ती हुए थे। उनकी अभी शादी नहीं हुई थी। उनके परिवार में एक बड़ा भाई, एक छोटी बहन है। मां की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। पिता विक्रम सिंह ने अब अपने बेटे को भी खो दिया।
सैनिक मोरसिंह की शहीद होने की खबर आने के बाद से ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई थी और आज अंतिम यात्रा में कोरोना का डर भी शहीद के सम्मान में लोग भूल गए और हजारों लोगों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार किया गया.

पांच लाख की घोषणा
कालापीपल विधायक कुणाल चौधरी ने शहीद मोरसिंह की स्मृति में पांच लाख रुपये विधायक निधि से देने की घोषणा की. इस निधि से रनायल में खेल मैदान बनाया जाएगा.

एक दिन देर से पंहुचा पार्थिव शरीर
अरूणाचल प्रदेश से सीधी विमान सेवा न होने से पहले पार्थिव शरीर को कोलकाता लाया गया। वहां से बैंगलोर और बैंगलोर से भोपाल लाया गया. भोपाल से पार्थिव शरीर को रनायल लाया गया। शहीद मोरसिंह की अंतिम यात्रा में भाजपा के बड़े नेताओं और जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अनुपस्थित रहे। अंतिम संस्कार की तैयारी भी ग्रामीणों ने पंचायत के सहयोग से की थी।