Sonam Wangchuk Released: लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और इनोवेटर सोनम वांगचुक की रिहाई के साथ ही राजस्थान की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। करीब 170 दिनों तक जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद रहे वांगचुक को मिली आजादी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए इस पूरी कार्रवाई को ‘विडंबना’ करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि जो व्यक्ति कभी प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का समर्थक रहा, लद्दाख के पर्यावरण और हक की आवाज उठाते ही वह सरकार की नजरों में देश की सुरक्षा के लिए खतरा कैसे बन गया?

गहलोत ने अपने पोस्ट में केंद्र सरकार से सवाल किया है कि अगर वांगचुक निर्दोष थे और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, तो उनकी 170 दिनों की कैद का जिम्मेदार कौन है? गहलोत ने आरोप लगाया कि NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) जैसी कठोर धाराओं का इस्तेमाल भाजपा ने अपने राजनीतिक नफा-नुकसान के लिए किया है। पूर्व सीएम ने कहा कि कानूनों का ऐसा सुविधाजनक इस्तेमाल देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है।

गिरफ्तारी का आधार और विवाद

सोनम वांगचुक को 24 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था और बाद में NSA के तहत जोधपुर जेल भेज दिया गया था। लद्दाख प्रशासन का उस समय यह तर्क था कि वांगचुक लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर उग्र आंदोलन कर रहे थे। प्रशासन ने उन पर स्थिति को हिंसक बनाने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया था।

एक ओर जहां राजनीतिक दल इस रिहाई को अपनी-अपनी जीत बता रहे हैं, वहीं वांगचुक की रिहाई ने लद्दाख में चल रहे आंदोलन को फिर से नई दिशा दे दी है। गहलोत के इस बयान के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानूनों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए किया जा रहा है। फिलहाल, वांगचुक की रिहाई के बाद लद्दाख की राजनीति और केंद्र के साथ उनके ‘संवाद’ पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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