कुमार इंदर, जबलपुर। पंचायत चुनाव को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। सड़क से लेकर सदन तक पंचायत चुनाव के नाम पर सियासत जारी है। अब मध्यप्रदेश सरकार पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। राज सरकार एक बार फिर रिकॉल पिटीशन के जरिए सुप्रीम कोर्ट से यह मांग करेगी कि पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग को भी शामिल किया जाए। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट विवेक तंखा का कहना है कि, सरकार को इस मामले में पहले दिन से ही सोचना था, उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, सरकार पंचायत चुनाव कराने के बारे में ना सोचकर विवेक तनखा के बारे में ज्यादा सोच रही थी।

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, यदि सरकार समझदार होती तो पहले दिन से ही सुप्रीम कोर्ट में इस बात को अपना पक्ष रखती। उन्होंने ने कहा कि, इस बात को लेकर हम भी उनका सपोर्ट करने के लिए तैयार थे । उनका कहना है कि, 17 दिसंबर को जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई चल रही थी तो सरकार के पैरोकार खामोश बैठे थे। उन्होंने ने कहा कि 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सरकार को मजबूत तरीके से ओबीसी का पक्ष रखना था, सुप्रीम कोर्ट बताना था कि, मध्यप्रदेश में ओबीसी के आंकड़े सर्वे और गणना के आधार पर है, लिहाजा उनको आरक्षण दिया जा रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं किया और उसी का नतीजा है कि सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी सीट को स्टे कर उनको जनरल में कन्वर्ट करने के लिए कहा।

सरकार खुद नहीं है जागरुक

इस मामले में सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में जागरूक रहना चाहिए, साथ ही अपने स्टाफ को भी जागरूक रहने की सलाह देना चाहिए। विवेक तंखा ने कहा कि, सरकार की नाकामी का नतीजा का खामियाजा पूरे प्रदेश को और ओबीसी वर्ग को झेलना पड़ रहा है। विवेक तंखा ने कहा कि हमने 21 साल से एससी एसटी ओबीसी का आरक्षण संभाल कर रखा लेकिन यह सरकार ओबीसी का वर्ग का पक्ष रखने में नाकाम साबित हुई है।

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सरकार को खुद नहीं पता क्या हो रहा है।

उन्होंने प्रदेश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि, इस सरकार को सिर्फ ओबीसी के नाम पर राजनीति कर सरकार को खुद नहीं पता क्या हो रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि, इस सरकार को सिर्फ ओबीसी के नाम पर राजनीति करना आता है, उसके अलावा कुछ नहीं।‌ कहा कि सरकार अगर सच में ओबीसी वर की हितैषी होती तो इस तरह से कानून को ताक पर रख के पंचायत चुनाव का अध्यादेश नहीं लाती। उन्होंने कहा कि, सरकार को ना तो कानून से मतलब है, नहीं कोर्ट के आदेश से ।‌इस सरकार को यह भी नहीं पता कि कोर्ट के देश में क्या चीज लिखा गया है।

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