विशेष : आदिवासी जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा काम, आदिवासी हितों पर सरकार का पूरा ध्यान

फीचर स्टोरी। छत्तीसगढ़ का स्वर्ग बस्तर में आदिवासी हितों के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. सरकार किसी भी मोर्चे पर आदिवासी हितों से समझौता नहीं करेगी. आदिवासियों ने अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. बस्तर में विकास आदिवासी जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा. वही काम होगा, जो आदिवासी चाहेंगे. आदिवासी हितों का सरकार ध्यान रखेगी. यह बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के साथ वर्चुअली चर्चा में कही है.

मुख्यमंत्री ने बस्तर के लिए यह ऐलान किया कि जैसे-जैसे मांग आदिवासियों की ओर से आती जाएगी पूरी की जाएगी. स्थानीय ग्रामीणों की मांग को उन्होंने पूरा भी किया. ग्रामीणों की ओर से जैसे यह कहा गया कि उन्होंने नक्सल प्रभावित जगरगुंडा में अस्पताल चाहिए, मुख्यमंत्री तत्काल 30 बिस्तर अस्पताल खोलने की घोषणा कर दी. इसके साथ ही उन्होंने बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में कई और विकासकार्यों की स्वीकृति प्रदान की.

आइये आपको बताते हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी हितों को ध्यान रखते हुए आदिवासियों की मांग पर क्या-क्या मंजूरी दी है…

गंगालूर क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों को मिलेगी लाल पानी की समस्या से मुक्ति

भूपेश बघेल के सामने नक्सल प्रभावित इलाके गंगालूर क्षेत्र के आदिवासियों ने साफ पेयजल की समस्या बताई और कहा कि लाल पानी से मुक्ति नहीं मि पा रही है. मुख्यमंत्री ने इस समस्या से आदिवासियों को निजात दिलाने 5 करोड़ रूपए की लागत से सिल्टेशन फिल्ट्रेशन स्ट्रक्चर एवं सोलर ड्यूल पम्प की स्थापना की घोषणा की. इस घोषणा के पूरा होने के बाद 10 ग्राम पंचायत गंगालूर, बुरजी, गोंगला, पुसनार, पीडिया, तोडका, गमपुर, कैका, रेड्डी और पालनार को इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी. इस प्लांट की स्थापना से इस क्षेत्र के 6 हजार परिवारों के लगभग 20 हजार लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा.

इसके साथ ही उन्होंने लगभग 43.08 करोड़ रुपए की लागत के 104 कार्यों की स्वीकृति के साथ भूमिपूजन किया. इसमें प्राथमिक शाला भवनों, आंगनबाड़ी, ग्राम पंचायत भवनों, उचित मूल्य की दुकानों, देवगुड़ी निर्माण, सोलर ड्यूल पम्प स्थापना, सीसी रोड निर्माण, हैण्ड पम्प स्थापना के कार्यों की स्वीकृति और भूमिपूजन शामिल है.

सुकमा जिले में 11 करोड़ 2 लाख रुपए की लागत के 16 कार्यों की स्वीकृत करने के साथ इनका भूमिपूजन भी किया. इन कार्यों में – 
  • एक करोड़ 65 लाख रुपए की लागत से सिलगेर ग्राम में विद्युत लाइन विस्तार
  • 2 करोड़ 35 लाख रुपए की लागत से ग्राम उरसांगल में 100 सीटर आश्रम भवन का निर्माण
  • एक करोड़ 78 लाख रुपए की लागत से सिलगेर में 50 सीटर आश्रम भवन का निर्माण
  • 20 लाख रुपए की लागत से ग्राम पंचायत सिलगेर सर्व आदिवासी समाज के सामाजिक भवन का निर्माण
  • एक करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से ग्राम सिलगेर-टेकलगुड़ा-पूवर्ती तक 9 किलोमीटर डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण
  • 72 लाख रुपए की लागत से चिमलीपेंटा-सिंगाराम-जगरगुण्डा तक 4 किलोमीटर डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण
  • 90 लाख रुपए की लागत से ग्राम कुन्देड़ से उरसांगल तक 5 किलोमीटर डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण
  • एक करोड़ 26 लाख रुपए की लागत से गोंदपल्ली से दरनदरभा तक 7 किलोमीटर डब्ल्यूबीएम सड़क
  • 10 लाख रुपए से ग्राम पंचायत पेंटाचिल्ली में सार्वभौमिक पीडीएस भवन निर्माण
  • 10 लाख रुपए की लागत से ग्राम पंचायत कुन्देड़ में सार्वभौमिक पीडीएस भवन निर्माण
  • 5 लाख रुपए की लागत से ग्राम पंचायत सिलगेर, कुन्देड़, पेंटाचिल्ली में देवगुड़ी निर्माण
  • 6 लाख 45 हजार रुपए की लागत से ग्राम पंचायत कुन्देड़, ग्राम उरसांगल और सिलगेर में आंगनबाड़ी भवन निर्माण
इसी तरह से मुख्यमंत्री ने बीजापुर जिले में 27 करोड़ 6 लाख रुपए की लागत के 87 कार्यों की स्वीकृति दी और भूमिपूजन किया. इन कार्यों में – 
  • उसूर क्षेत्र में 15 करोड़ 41 लाख रुपए की लागत के कार्य
  • चिपुरभट्टी में 83 लाख 71 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • कोरसागुड़ा में 67 लाख 71 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • मलेपल्ली में 52 लाख 13 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • लिंगागिरी में एक करोड़ 22 लाख 93 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • फुतकेल में 75 लाख 76 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • बासागुड़ा में एक करोड़ 21 लाख रुपए की लागत के कार्य
  • पुसबाका में 11 लाख 68 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • चिन्नागेल्लूर में 17 लाख 36 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • कोण्डापल्ली में 8 लाख 68 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • गगनपल्ली में 18 लाख 86 हजार रुपए की लागत के कार्य
  • नम्बी में 13 लाख 82 हजार रुपए की लागत के कार्यं की स्वीकृति

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन एवं पेयजल से संबंधित 3 करोड़ 60 लाख 60 हजार रुपए की लागत के कार्यों की स्वीकृति देने के साथ उनका भूमिपूजन किया. इन कार्यों में तर्रेम क्षेत्र में सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप खनन कार्य, बाजार शेड निर्माण, व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स, सोलर स्ट्रीट लाईट 2 किलो मीटर देवगुड़ी का निर्माण प्राथमिक शाला भवन, जल जीवन मिशन अंतर्गत नल जल योजना, इसके अतिरिक्त चिकुरभटटी में सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप पंचयात भवन, आंगनबाड़ी, राशन दुकान, देवगुड़ी कोरसागुड़ में सोलर ड्यूल पंप, साकरेगुडा में सोेलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, राशन दुकान राजपेटा में देवगुड़ी निर्माण, मल्लेपल्ली पंचायत अंतर्गत सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप, राशन दुकान, पंचायत भवन देवगुड़ी निर्माण लिगांगिरी पंचायत में सोलर ड्यूल पंप हैण्ड पंप उपस्वाथ्य केंन्द राशन दुकान पंचायत भवन देवगुड़ी निर्माण धरमापुर में हैण्ड पंप सुरनार, बडे सुकनपल्ली, ग्राम पंचायत पुतकेल से सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप आंगनबाड़ी राशन दुकान, पंचायत भवन देवगुड़ी निर्माण बासागुड़ा पंचायत में सोलर ड्यूल पंप हैण्ड पंप बाजार शेड, देवगुड़ी, पंचायत भवन नल जल योजना पुसबाका में सोलर ड्यूल पंप एवं हैण्ड पंप, चिन्नागेलूर में सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप, कोण्डापल्ली में सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप, गगनपल्ली में सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप, नम्बी सोलर ड्यूल पंप, हैण्ड पंप एवं विभिन्न पंचायतों में आजीविका संवर्धन एवं पेय जल कार्य स्वीकृत किया. उसूर क्षेत्र अंतर्गत तर्रेम में सड़क निर्माण कार्य आउटपल्ली एवं तक रेंगापरा तक, तर्रेम में सीसी रोड, 100 सीटर कन्या, बालक छात्रवास निर्माण सड़क निर्माण सीआरपी एफ कैंप से सारकेगुड़ा तक आंतरिक विद्युतिकरण कार्य, सोलर लाईट व्यवस्था सुरना बड़े सुकनपल्ली छोटे सुकनपल्ली, लिंगागिरी में विद्युत लाईन विस्तार, सी.सी. रोड निर्माण कार्य लिंगागिरी, आंतरिक विद्युतिकरण कार्य शामिल हैं.

 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीजापुर और सुकमा जिले के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के साथ वर्चुअल संवाद में कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि इस बैठक में सभी लोगों के साथ सार्थक चर्चा हुई. सभी लोग क्षेत्र में शांति, विकास और न्याय चाहते हैं.

गाँवों में युवाओं के नेतृत्व में विकास समिति, काबिज लोगों वन अधिकार

वहीं मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि गांवों में ग्राम विकास समिति का गठन किया जाए, जिसमें पढ़े लिखे युवाओं को शामिल किया जाए. विशेष परिस्थितियों में जहां सरपंच नहीं रहते हैं, वहां इस समिति को निर्माण कार्य सौंपे जाएंगे. उन्होंने सभी समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों से अपील की कि जिस भूमि पर मूल निवासी काबिज हैं, उनका नक्शा तैयार करा कर वन अधिकार मान्यता अधिनियम के तहत काबिज जमीन का पट्टा दिलाने की पहल की जाए.

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