उत्तम कुमार, मुजफ्फरपुर। जिलेवासियों के लोगों के लिए खुशी की खबर है। दरअसल अब शहर की पहचान मानी जाने वाली शाही लीची से जुड़ी ‘लिचीपुरम आर्ट’ को नया मंच मिल गया है। बिहार के खादी मॉल में इस खास कला से तैयार करीब चार दर्जन तरह के उत्पादों को बिक्री के लिए रखा गया है। इससे न सिर्फ स्थानीय कला को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लोगों को भी इस नई कला शैली को करीब से देखने और खरीदने का मौका मिलेगा।

कलाकारों में बढ़ा उत्साह

दरअसल, करीब एक साल पहले पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता ने मुजफ्फरपुर की शाही लीची को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से ‘लिचीपुरम पुनर्जागरण अभियान’ की शुरुआत की थी। इसी पहल से प्रेरित होकर ज्ञानदीप क्रिएशन की संचालिका नीतू तुलस्यान ने ‘लीचीपुरम आर्ट’ को अपनाया और पिछले एक वर्ष से इस कला के जरिए कपड़े, सजावटी सामान और गिफ्ट आइटम तैयार किए जा रहे हैं। अब इन्हीं उत्पादों को खादी मॉल में जगह मिलने से कलाकारों का उत्साह और बढ़ गया है।

अतिथियों का हुआ सम्मान

खादी मॉल में लीचीपुरम आर्ट के काउंटर का उद्घाटन मेयर निर्मला साहू, भाजपा जिला अध्यक्ष विवेक कुमार और लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नृत्यांगना डॉ. रंजना सरकार, शाकुंतलम के निदेशक, वार्ड पार्षद केपी पप्पू, शिक्षाविद और कला-संस्कृति से जुड़े कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्याम सुंदर भिमसेरिया सहित अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान ज्ञानदीप क्रिएशन की टीम और संचालिका नीतू तुलस्यान ने अतिथियों को लिचीपुरम आर्ट से तैयार स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

विरासत को बचाने के लिए लीचीपुरम पुनर्जागरण अभियान

पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता ने बतायाकि, मुजफ्फरपुर कभी अपनी शाही लीची के लिए देश-विदेश में मशहूर था, लेकिन समय के साथ बड़ी संख्या में लीची के पेड़ कट गए। ऐसे में इस विरासत को बचाने और नई पहचान देने के लिए लीचीपुरम पुनर्जागरण अभियान शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि ज्ञानदीप क्रिएशन ने इस पहल को गंभीरता से आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप आज खादी मॉल में लिचीपुरम आर्ट को जगह मिलना बड़ी उपलब्धि है।

लोगों को पंसद आ रहा लीचीपुरम आर्ट

वहीं, ज्ञानदीप क्रिएशन की संस्थापिका नीतू तुलस्यान ने बताया कि, लिचीपुरम आर्ट एक नई कला शैली है, जिसे लोग तेजी से पसंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था की छात्राओं ने इस कला को विकसित करने में काफी मेहनत की है। अभी तक करीब चार दर्जन तरह के कपड़े, सजावटी सामान और गिफ्ट आइटम पर इस कला को उकेरा गया है, जो अब खादी मॉल में आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस कला को और विस्तार दिया जाएगा, ताकि मुजफ्फरपुर की लीची से जुड़ी यह अनोखी पहचान देशभर में और मजबूत हो सके।

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