चैत्र नवरात्रि पर विशेष -सम्पादकीय

“देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥”

यह श्लोक जीवन में समग्र सफलता और शांति की कामना करता है- “हे माँ, मुझे सौभाग्य, स्वास्थ्य, परम सुख, सुंदरता, विजय और यश प्रदान करें और मेरे शत्रुओं और बाधाओं का नाश करें।”

भारतीय संस्कृति में त्योहार परम्पराओं के अलावा जीवन को संतुलित, समृद्ध और जागरूक बनाने के सूत्र होते हैं। इन्हीं त्योहारों में से एक है आस्था, आत्मसंयम, विज्ञान और स्वास्थ्य का अद्भुत संगम, चैत्र नवरात्रि। देवी आराधना का यह पर्व आत्मशुद्धि, नवसृजन और सकारात्मक ऊर्जा का महापर्व है। वसंत ऋतु के आगमन और नववर्ष के साथ शुरू होने वाला यह नौ दिवसीय पर्व प्रकृति और मानव जीवन दोनों के पुनरुत्थान का प्रतीक है।

आत्मा के शुद्धिकरण का पर्व – नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि का सबसे प्रमुख घटक आध्यात्मिक साधना है। माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना के दिन होते हैं। माँ दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप जीवन के अलग-अलग आयामों को दर्शाने वाले होते हैं। चैत्र नवरात्रि का यह समय आत्मनिरीक्षण के लिए उत्तम होता है। व्रत, ध्यान और जप के माध्यम से जब व्यक्ति अपने भीतर झांककर अपनी कमजोरियों और नकारात्मकताओं को पहचानता है तब मन की अशुद्धियां दूर होती हैं और आत्मबल का विकास होता है, नवरात्रि को ‘आत्मा के शुद्धिकरण का पर्व’ भी कहा जा सकता है।


72 वर्षों के बाद बना दुर्लभ योग

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ जीवन में नई ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत है। यह देवत्व से आपूर समय हमें पुराने विचारों, बुरी आदतों और नकारात्मक भावनाओं को त्यागकर नए संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। 19 मार्च से प्रारंभ हो रही है स्नान, दान और घटस्थापना वाली नवरात्रि। इस साल की नवरात्र विशेष संयोग लेकर आई है जिसमें अमावस्या और प्रतिपदा एक ही दिन पड़ रही हैं। यह दुर्लभ योग लगभग 72 वर्षों के बाद बना है जो इसे आध्यात्मिक रूप से और भी शक्तिशाली बनाने वाला है। यदि नवरात्रि को वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो यह प्रकृति और मानव शरीर के बीच गहरे संबंध को दर्शाने वाला महापर्व होता है। वसंत ऋतु में मौसम परिवर्तन के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से प्रभावित होती है। इस समय शरीर को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। व्रत या उपवास रखने की परंपरा का वैज्ञानिक आधार यही है कि इससे पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है। इस समय लिया गया हल्का और सात्विक भोजन शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। नवरात्र में जौ बोने की परंपरा भी विज्ञान सम्मत है। यह कृषि चक्र की शुरुआत का संकेत भी है साथ ही जौ के अंकुरण से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जौ को समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।

नवरात्रि स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी

नवरात्रि का उपवास धार्मिकता के साथ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह शरीर को आंतरिक रूप से शुद्ध कर शरीर में जमें विषैले तत्व को बाहर करता है जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर हल्का महसूस करता है। इस समय ध्यान और योग करने से मानसिक और शारीरिक संतुलन तेज़ी से सुधरता है। सुबह जल्दी उठना, नियमित पूजा करना और सात्विक जीवनशैली अपनाना शरीर की बायोलोजिकल क्लॉक यानी जैविक घड़ी को संतुलित रखता है। वर्तमान के तनावपूर्ण जीवन शैली में नवरात्रि मानसिक शांति का अद्भुत माध्यम है। जब व्यक्ति पूजा, ध्यान और भक्ति में होता है तब उसका मन तनाव और चिंता से मुक्त होता है।

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नारी सम्मान और समानता का संदेश

नवरात्रि के नौ दिनों तक संयमित जीवन जीना, सकारात्मक विचार रखना, क्रोध और ईर्ष्या जैसे भावों से दूर रहना हमारे दिमाग़ी संतुलन को मजबूत करते हुए हमें अनुशासित रखता है। इस महापर्व का लाभ कई बार हमें मानसिक थेरेपी की तरह भी मिलता है। इस पर्व में छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा समाज में नारी सम्मान और समानता का संदेश देती है। भगवान राम के जन्मोत्सव पर नवरात्रि के अंतिम दिन मनाई जाने वाली राम नवमी हमें धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है। नवरात्रि देवी आराधना के साथ हमें प्रभु श्री राम के आदर्श जीवन मूल्यों से जोड़ने का भी काम करती है।

जीवन की बाधाएं होती हैं दूर

वसंत ऋतु में प्रकृति जब नई ऊर्जा से भर कर पेड़ों पर नए पत्ते और फूल खिलाती हैं तब हम भी इस नवसृजन से स्वतः ही जुड़ने लगते हैं प्रकृति की तरह हम भी हर साल खुद को एक नया रूप देकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है। इस चमत्कार में सिर्फ़ आस्था नहीं बल्कि नवरात्र में पैदा हुई सकारात्मक सोच का भी योगदान है। जब व्यक्ति पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ साधना करता है तो उसके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होता है।

सकारात्मकता,अनुशासन और आत्मबल को अपनाए

चैत्र नवरात्रि जिसे बासंती नवरात्रि भी कहा जाता है यह एक ऐसा धार्मिक अनुष्ठान है जो जीवन को संतुलित और समृद्ध बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह पर्व आध्यात्मिक शुद्धि, वैज्ञानिक संतुलन, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक शांति का अद्भुत संगम है। भागदौड़ भरी जिंदगी में नवरात्रि हमें रुककर खुद को समझने, सुधारने और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। यदि हम इस पर्व के वास्तविक अर्थ को समझ लें तो नवरात्र केवल नौ दिनों का उत्सव नहीं बल्कि पूरे जीवन को बदलने का माध्यम बन सकती है। हम कामना करते हैं और आप संकल्प लें कि इस चैत्र नवरात्रि को हम केवल पूजा ही न करें बल्कि अपने भीतर की नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मकता, अनुशासन और आत्मबल को अपनाएँगे क्योंकि यही इस पर्व की सच्ची साधना है।

संदीप अखिल,
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/ लल्लूराम डॉट कॉम