विशेष : कोरोना संकट में स्कूली बच्चों को मिला संबल, मध्यान्ह भोजन देने में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

राज्य के 90 प्रतिशत से अधिक स्कूली बच्चों को मिला सूखा राशन का लाभ

फीचर स्टोरी। कोरोना संकट ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. हर सेक्टर में स्थिति खराब है. विपरीत परिस्थिति से उबरने में एक लंबा वक्त लगेगा. राज्यों में अनेक योजनाएं संकट में है. लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहाँ कोरोना का संकट तो है, लेकिन फिर भी देश के अन्य राज्यों से स्थिति अच्छी है. छत्तीसगढ़ में वर्तमान में मरीजों की संख्या अधिक तो है, लेकिन खतरनाक नहीं.

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हर सेक्टर में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन

संकट के इस घड़ी में भी छत्तीसगढ़ ने कई मोर्चों में इतना अच्छा काम किया है कि वह अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल है. संकट के इसी दौर में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह भी दिखाया है कि योजनाओं का कैसे बेहतर क्रियान्वनय किया जा सकता है. फिर चाहे बात मनरेगा में रोजगार देने की हो या फिर तेंदूपत्ता संग्राहकों से खरीदी और भुगतान की. बात किसानों और गौपलाकों संग न्याय करने की हो या फिर शिक्षित युवाओं के लिए भर्ती प्रकिया शुरू करने की. हर जगह छत्तीसगढ़ सरकार देश में नंबर वन ही रहा है.

अब कोरोना संकट के इस विपरीत समय में स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन देने में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है. दरअसल लॉकडाउन के बाद जब स्कूल बंद हुए और हालात नहीं सुधरने की स्थिति में यह रहा कि स्कूल नहीं खुलेंगे तो भूपेश सरकार ने तय कि स्कूल नहीं खुलेंगे तब भी बच्चों को उनके हक पूरा मध्यान्ह भोजन दिया जाएगा. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ चर्चा कर यह तय किया कि प्रदेश के सभी स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन के तहत सुखा राशन दिया जाएगा.

90 प्रतिशत अधिक बच्चों को लाभ

आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चें प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है. लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा. लेकिन जब इसी सवाल का जवाब आप छत्तीसगढ़ में ढूँढेंगे तो पाएंगे कि प्रदेश में तो 90 प्रतिशत बच्चों को इसका लाभ मिला है.

आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि कोरोना संकट के बीच भी मध्यान्ह भोजन देने में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है. रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है, लेकिन इसी रिपोर्ट में हैरानी करने वाली बात यह भी है कि भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन मिला ही नहीं है. सर्वेक्षण में यह भी बात सामने आई है कि उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया. वहीं छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया.

कोर्ट के निर्देश पर तत्काल अमल

दरअसल लॉकडाउन के दौरान मार्च महीने में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट के इस निर्देश पर अमल करते हुए भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ में तत्काल कदम उठाए. सरकार यह निर्देशित किया कि स्कूली बच्चों के घरों तक सुखा राशन पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराएं.

इस संदर्भ में भूपेश बघेल ने 21 मार्च 2020 को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए. गांव-गांव में इसकी मुनादी करायी गई.परिणाम यह रहा कि-

छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया.

इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए.

16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया.
अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण पूरा.

राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ.

बता दें कि मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से की गई. वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं. राज्य सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं, तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए.


खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल एवं कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की गई. मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहलीं से आठवीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया गया.

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