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फ़ीचर स्टोरी. वनों से परिपूर्ण इस प्रदेश में ज्यादातर आदिवासियों की आजाविका वनोपज पर ही निर्भर है. ऐसे में जंगल में निवास करने वाले आदिवासियों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाना, उन्हें सामाजिक तौर पर सुरक्षा देना सरकार की ज़िम्मेदारी है. क़रीब साढ़े तीन साल से राज्य की भूपेश सरकार इस ज़िम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रही है. भूपेश सरकार ने वनवासियों के हितों को ध्यान में रखकर न सिर्फ़ योजनाएं बनाई, बल्कि हितग्राहियों को समूचित लाभ भी हो इस बात का भी ध्यान रखा. इस रिपोर्ट में बात करेंगे शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना की.

छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदाने के लिए भूपेश सरकार ने अगस्त 2020 में इस योजना की शुरुआत की थी. योजना के तहत संग्राहक परिवारों को अदान सहायता राशि प्रदान की जाती है. राज्य में योजना के अंतर्गत 05 अगस्त 2020 से माह दिसम्बर 2021 तक 3 हजार 827 प्रकरणों में 57 करोड़ 52 लाख रूपए की राशि का भुगतान किए जा चुके हैं. योजना के तहत संग्राहक परिवार में अगर किसी मृत्यु हो जाती है उन्हें सहायता राशि दी जाती है. इसमें सामान्य मृत्यु, दुर्घटना में मृत्यु, घायल होने पर 2 लाख और 1 लाख रुपये तक अनुदान राशि प्रदान की जाती है.

जैसे- जिनकी आयु मृत्यु दिनांक को 18 से 50 वर्ष तक हो, उसकी सामान्य मृत्यु होने पर उसके द्वारा नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को दो लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि प्रदान की जाती है. दुर्घटना से मृत्यु होने पर दो लाख रूपए की राशि अतिरिक्त रूप से प्रदान की जाती है. दुर्घटना से पूर्ण निःशक्तता की स्थिति में दो लाख रूपए तथा आंशिक निःशक्तता की स्थिति में एक लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि दुर्घटनाग्रस्त पात्र तेंदूपत्ता संग्राहक को प्रदान की जाती है.

इसी तरह तेंदूपत्ता संग्रहण में लगे पंजीकृत संग्राहक परिवार के मुखिया, जिनकी आयु मृत्यु दिनांक को 51 से 59 वर्ष के बीच हो, उसकी सामान्य मृत्यु होने पर उसके द्वारा नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को 30 हजार रूपए तथा दुर्घटना से मृत्यु होने पर 75 हजार रूपए की सहायता अनुदान राशि प्रदान की जाती है. दुर्घटना में पूर्ण निःशक्तता की स्थिति में 75 हजार रूपए तथा आंशिक निःशक्तता की स्थिति में 37 हजार 500 रूपए की सहायता अनुदान राशि दुर्घटनाग्रस्त पात्र तेंदूपत्ता संग्राहक को प्रदान की जाती है.


जिलेवार आँकड़ा-
तेंदूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा के तहत जो राशि दी गई एक नज़र उन आँकड़ों पर-
वन मंडलवार बीजापुर अंतर्गत 219 प्रकरणों में 03 करोड़ 58 लाख रूपए, सुकमा के 46 प्रकरणों में 81 लाख, दंतेवाड़ा के 78 प्रकरणों में एक करोड़ 37 लाख रूपए तथा जगदलपुर के 16 प्रकरणों में 29 लाख 65 हजार रूपए की राशि स्वीकृत है.

इसी तरह पश्चिम भानुप्रतापपुर के 187 प्रकरणों में 2 करोड़ 83 लाख रूपए, पूर्व भानुप्रतापपुर के 314 प्रकरणों में 4 करोड़ 38 लाख रूपए, कोण्डागांव के 27 प्रकरणों में 34 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है.


वन मंडलवार नारायणपुर के 47 प्रकरणों में 77 लाख रूपए, कांकेर के 262 प्रकरणों में 3 करोड़ 64 लाख रूपए, केशकाल के 22 प्रकरणों में 32 लाख रूपए तथा मरवाही के 31 प्रकरणों में 52 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है. बिलासपुर के 53 प्रकरणों में 64 लाख रूपए, कोरबा के 155 प्रकरणों में 02 करोड़ 51 लाख रूपए, कटघोरा के 100 प्रकरणों में 01 करोड़ 57 लाख रूपए, रायगढ़ के 277 प्रकरणों में 04 करोड़ 48 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है. इसके अलावा धरमजयगढ़ के 157 प्रकरणों में 02 करोड़ 54 लाख रूपए तथा जांजगीर-चांपा के 34 प्रकरणों में 58 लाख रूपए रूपए की राशि स्वीकृत है.


वन मंडलवार बालोद के 89 प्रकरणों में 01 करोड़ 29 लाख रूपए, कवर्धा के 52 प्रकरणों में 74 लाख रूपए, धमतरी के 137 प्रकरणों में 01 करोड़ 78 लाख रूपए तथा गरियाबंद के 390 प्रकरणों में 05 करोड़ 37 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है. महासमुंद के 344 प्रकरणों में 05 करोड़ 30 लाख रूपए, बलौदाबाजार के 47 प्रकरणों में 72 लाख रूपए, सरगुजा के 59 प्रकरणों में 01 करोड़ 11 लाख रूपए तथा सूरजपुर के 73 प्रकरणों में 01 करोड़ 31 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है. इसके अलावा बलरामपुर के 172 प्रकरणों में 03 करोड़ 2 लाख रूपए, कोरिया के 38 प्रकरणों में 57 लाख रूपए, मनेन्द्रगढ़ के 47 प्रकरणों में 81 लाख रूपए तथा जशपुर नगर के 75 प्रकरणों में 01 करोड़ 12 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है.

जानिए क्या कहते हैं योजना से लाभांवित हितग्राही

प्रियंका सलाम, कांकेर
कांकेर निवासी प्रियंका सलाम कहती हैं कि वनवासी हमेशा कई अभावों और असुरक्षा के बीच ही जीवन गुजारते रहे हैं. जिन आदिवासियों का जीवन वनपोज पर ही निर्भर है उनके लिए जीवन और भी कठिन हो जाता है. लेकिन भूपेश सरकार ने लाखों आदिवासी परिवारों को असुरक्षा की चिंता से मुक्त कर दिया है. क्योंकि सरकार अब तेंदूपत्ता संग्राहकों को न सिर्फ तेंदूपत्ता संग्रहण का पैसा दे रही है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के तहत अदान सहायता राशि भी दे रही है. इससे संग्राहक परिवार किसी भी तरह की अनहोनी के समय आने वाली आर्थिक संकट से एक तरह मुक्त हो गया है. मैं अपने परिवार की ओर से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर सरकार का दिल से आभार जताती हूँ.

रामरतन शोरी, कांकेर

कांकेर जिले का ही रहने वाला रामरतन शोरी बताता है कि वह अपने परिवार के साथ तेंदूपत्ता संग्रहण काम सालों से कर रहा है. संग्रहण से जहाँ पहले की अपेक्षा अब दाम अच्छे मिल रहे हैं, तो वही सामाजिक सुरक्षा की चिंता भी सरकार ने दूर कर दी है. पहले हम संग्राहक परिवारों को प्रति मानक बोरा 25 सौ रुपये मिलता था, लेकिन 4 हजार रुपये मिलता है. वहीं सामाजिक सुरक्षा योजना शुरू होने के बाद से ही अब आकास्मिक घटनाओं के दौरान होने वाली चिंताओं से मुक्ति मिल गई है. सामजाकि सुरक्षा के तहत 4 लाख रुपये तक जो अदान सहायता राशि दी जा रही है वह संकट के समय काफी महत्वपूर्ण है.


सातो बाई

सातो बाई कहती हैं कि तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना संग्राहक परिवारों के लिए काफी अहम है. योजना से चिंताएं दूर हुई, संग्राहक परिवारों को मदद मिली. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार ने हम वनवासी तेन्दूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही है, जिससे हमें और अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए अच्छा है इसलिए हम सहपरिवार मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं.

बता दें कि तेंदूपत्ता के विक्रय के पश्चात गणना के उपरांत लाभ वाली समितियों के संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक प्रदान किया जाता है. छत्तीसगढ़ में 31 ज़िला युनियन, 901 प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति, 10300 संग्रहण केंद्र और 13.76 लाख परिवार तेंदूपत्ता के संग्रहण का काम करते हैं.