IAS शिखा राजपूत के खिलाफ जांच के आदेश, स्पेशल सेक्रेटरी हेल्थ भुवनेश यादव को सौंपा जिम्मा

रायपुर- तत्कालीन हेल्थ डायरेक्टर शिखा राजपूत तिवारी के खिलाफ राज्य शासन ने जांच बिठा दी है. यह जांच आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा और संजीवन सहायता कोष योजना में हुई गड़बड़ियों की शिकायत के बाद बिठाई गई है. जांच का जिम्मा स्पेशल सेक्रेटरी हेल्थ भुवनेश यादव को सौंपा गया है. जांच प्रतिवेदन दस दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. शिखा राजपूत तिवारी हाल ही में बेमेतरा कलेक्टर बनाई गई है. पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के एडिशनल सीईओ विजयेंद्र कटरे की संविदा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव की नाराजगी के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में इसे खींचतान से जोड़कर भी देखा गया. 

सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारिक को बिलासपुर, जांजगीर चांपा और रायपुर के कुछ डाक्टरों ने लिखित शिकायत दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा और संजीवनी सहायता कोष के क्लेम में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है. डाक्टरों ने अपने आरोप में कहा था कि अस्पतालों से अवैध वसूली की जा रही है. जानबूझकर भुगतान रोके जा रहे हैं. भुगतान के बदले 5 से 10 फीसदी तक कमीशन की मांग की जा रही है. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सचिव निहारिका बारिक ने स्पेशल सेक्रेटरी हेल्थ भुवनेश यादव को जांच का जिम्मा देते हुए दस दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन तलब किया है. 

रद्द क्लेम का भुगतान कर दिया गया !

सूत्र बताते हैं कि आयुष्मान योजना के तहत ऐसे क्लेम जिन्हें रिजेक्ट किया जा चुका था. उन क्लेम का भी भुगतान कर दिया गया. ऐसे रिजेक्टेड क्लेम की संख्या करीब छह हजार बताई जा रही है. स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि विभागीय मंत्री और प्रमुख सचिव की अनुमति के बगैर दिल्ली के सर्वर का पासकोड लेकर रद्द क्लेम का भुगतान कर दिया गया.

तीन बिंदुओं पर होगी जांच

भुवनेश यादव तीन मुख्य बिंदुओं पर जांच करेंगे. हेल्थ डिपार्टमेंट से जारी निर्देश में कहा गया है कि आयुष्मान योजना, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना और संजीवनी सहायता कोष से जुड़े भुगतान के लिए क्या अस्पतालों से कमीशन की मांग की गई? क्या अस्पतालों से संजीवनी सहायता कोष भुगतान दिए जाने में भेदभाव किया जा रहा है अथवा भुगतान में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है? क्या योजना से बाहर किए गए अस्पतालों का पुनः पंजीयन उच्च अधिकारियों के बिना अनुमोदन या अनुमति से संचालनालय स्तर पर ही कर लिया गया. 

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