रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट एसोसिएशन के पदाधिकारी गुरुबक्स सिंह छाबड़ा, दीपक रहेजा, रजत छाबड़ा, हेमंत, संतोष ने वर्ष 2025-26 की नई संपत्ति गाइडलाइन दरों को लेकर मुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय मंत्रियों को तीखा आपत्ति और सुझाव देते हुए ज्ञापन सौंपा गया है. एसोसिएशन का दावा है कि 20 नवंबर 2025 को जारी नई दरों में एक ही साल में जमीन-मकान के दाम 500% से लेकर 900% तक बढ़ा दिए गए हैं, जो पूरी तरह अव्यवहारिक और जनविरोधी है.


मुख्य आपत्तियां एक नजर में
- पंजीयन शुल्क में धांधली
2018-19 में बाजार मूल्य में 30% छूट के साथ पंजीयन शुल्क बढ़ाया गया था। 2024 में 30% छूट खत्म कर दी गई, लेकिन पंजीयन शुल्क (जमीन पर 4% और 75 लाख तक के मकान पर 2%) को कम नहीं किया गया। एसोसिएशन की मांग – अब जब 100% बाजार मूल्य लिया जा रहा है तो पंजीयन शुल्क भी पुराने 0.8% किया जाए।
- एक ही जमीन, दो अलग-अलग दरें 725% से 888% तक उछाल
लाभांडी (रायपुर) में 0.405 हैक्टेयर रोड साइड जमीन का मूल्य पिछले साल ₹1.77 करोड़ था, अब ₹12.79 करोड़यानी 725% की छलांग
निमोरा (नवा रायपुर) में ₹15.88 लाख से सीधे ₹1.41 करोड़ यानी 888% की बढ़ोतरी।
एसोसिएशन का सवाल क्या एक साल में जमीन की कीमत 7-9 गुना बढ़ सकती है?
- बहुमंजिला इमारतों में तीन गुना टैक्स
10,000 वर्गफीट जमीन पर 30,000 वर्गफीट सुपर बिल्ट-अप बनता है, लेकिन पूरा 30,000 वर्गफीट का स्टाम्प ड्यूटी लिया जा रहा है. एसोसिएशन की मांग – पुराने नियम (2004 से पहले) की तरह अनुपातिक मूल्यांकन लागू हो.
- नवा रायपुर के गांवों को जबरन नगरीय क्षेत्र घोषित करना
80% से ज्यादा गांवों में आज भी खेती हो रही है, सड़क, पानी, बिजली, नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं. फिर भी नगरीय क्षेत्र घोषित कर दो गुना मुआवजा देकर किसानों को ठगा जा रहा है ग्रामीण क्षेत्र में 4 गुना मुआवजा मिलता, हैरानी की बात – गांव नगरीय क्षेत्र में हैं, लेकिन सरपंच-पंच के चुनाव भी हो रहे हैं. दोहरी व्यवस्था है
- ग्रामीण क्षेत्र की हर सड़क को मुख्य मार्ग मानना
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की कच्ची-पक्की सड़कों को भी राष्ट्रीय राजमार्ग के बराबर मूल्य लगाया जा रहा है
- भारतमाला एक्सप्रेस-वे के बगल की जमीन को भी मनमाने दाम
जहां किसानों को मुआवजा अंदरूनी दर से मिला और एक्सप्रेस-वे में एंट्री तक नहीं है, वहीं गाइडलाइन में 11,000 प्रति वर्गमीटर और 2.52 करोड़ प्रति हैक्टेयर लगा दिया गया।
- प्रशासनिक आदेश में तारीखों की धांधली
7 अक्टूबर 2025 का आदेश 7 नवंबर 2025 दिखाकर एक महीने पहले चहेतों को जानकारी दे दी गई. एसोसिएशन ने इसे मिलीभगत बताया.
एसोसिएशन का साफ कहना है, पिछले 7 साल में गाइडलाइन नहीं बढ़ी तो भी अधिकतम 190-200% बढ़ोतरी ही जायज थी, न कि 500-900%। यह आम जनता, मध्यम वर्ग और रियल एस्टेट सेक्टर को कुचलने की साजिश है.
पुरानी व्यवस्था 2017-18 तक
नियमों की संख्य – 77 प्रावधान (जटिल, विसंगतियां जैसे फसल-आधारित 25% वृद्धि, नलकूप, दीवार के लिए अलग दरें
मुख्य मार्ग की परिभाषा -अस्पष्ट किसी भी भीड़भाड़ वाली सड़क को मुख्य मान लिया जाता था
क्षेत्र-आधारित दरें – वार्ड में एकसमान दरें नई कॉलोनियों, हाईवे के लिए 7 साल इंतजार करना पड़ता था
भूमि प्रकार- कृषि, डायवर्टेड, नजूल भूमि के लिए अलग गणना, दो फसली भूमि पर 25% अतिरिक्त
वृद्धि प्रतिशत- 2018-19 से कोई बदलाव नहीं, कांग्रेस सरकार में 30% छूट दी गई थी
नई व्यवस्था 20 नवंबर 2025 से
14 सरल प्रावधान एकसमान मूल्यांकन, फसल, नलकूप पर अतिरिक्त वृद्धि समाप्त |
केवल 18 मीटर या अधिक चौड़ी सड़क NH/SH जिला मुख्य मार्ग को मुख्य माना जाएगा
सड़क, वार्ड, स्थिति के आधार पर एकसमान, नई कॉलोनियों के लिए तत्काल विशेष दरें
सभी प्रकार कृषि, डायवर्टेड, नजूल के लिए एकसमान सिस्टम
शहरी: 20%; ग्रामीण: 50-300%; कुल 10-100%
प्रभाव, लाभ
भ्रम और अतिरिक्त शुल्क समाप्त, रजिस्ट्री आसान
दरें निष्पक्ष बायपास और मुख्य मार्ग पर एकसमान दरें
बाजार मूल्य से अंतर कम, नए इलाकों में तुरंत अपडेट
सरलीकरण, किसानों को अधिक मुआवजा 3 गुना तक
बाजार अंतर जैसे हिरापुर चौक, पुरानी 2200 वर्गफुट vs बाजार 15000-20000) कम, आयकर राजस्व बढ़ेगा.
प्रभाव और सलाह
सकारात्मक – रजिस्ट्री में भ्रम समाप्त, बैंक लोन बढ़ेंगे पुरानी कम दरों से सीमित थे, भूमि अधिग्रहण में किसानों को लाभ, मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश, यह बदलाव आम जनता के लिए राहत और चुनौती दोनों लाता है.
नकारात्मक– 20 लाख की जमीन पर स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्री शुल्क 2 लाख बढ़ सकता है, बिल्डरों के घर महंगे होंगे.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले 8 सालों से न बदली गई गाइडलाइन दरों को अब वैज्ञानिक और तर्कसंगत तरीके से संशोधित किया है, नई दरें किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों को वास्तविक मूल्य का फायदा देंगी, गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक पुनरीक्षण किसानों और जनता को वास्तविक लाभ देगा, हमारी मंशा साफ है हर नागरिक को उसकी संपत्ति का उचित मूल्य मिले.
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव ने कहा 2017-18 के बाद पहली बार हुए इस पुनरीक्षण में शहरी क्षेत्रों में लगभग 20% की तार्किक बढ़ोतरी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से 300% तक वृद्धि की गई है. सरकार के अनुसार इससे किसानों को भूमि अधिग्रहण में तीन गुना तक अधिक मुआवज़ा मिलेगा और संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक लोन भी स्वीकृत होगा. बताया जाता है कि गाइडलाइन के पुराने ढांचे में शहरों और गांवों में भारी विसंगतियां थीं. एल एक ही सड़क या गांव में अलग-अलग दरें होने से नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ता था. अब पहली बार दरों को रोड-वाइज और मैपिंग-आधारित बनाकर सरल और समझने योग्य किया गया है.जमीन दर गाइड लाइन को लेकर डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार लगातार रिफॉर्म करने में लगी हुई है, जहां-जहां पर पॉलिसी में योजनाओं में सुधार की जरूरत है. संशोधन की जरूरत है. वहां पर संशोधन कर रहे हैं और यह भी उसी का एक नतीजा है.
इस फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार जमीन कारोबारियों और भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने वाला कदम उठा रही है. पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि बीजेपी लोगो को बेरोजगार करने का काम कर रही है, कभी जमीन व्यापर करने वालों का नामंकन और रजिस्ट्री को रोकने का काम करती है, कभी खरीदी बीक्री में रजिस्ट्री शुल्क लगाकर उनको नुकसान पहुंचाने का काम करती है उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार थी तब सबको रियायत देने का काम किया, लेकिन अब वो लोग सत्ता में बैठे जो जमीन का व्यपार करने वाले है. भूमाफियाओं को जमीन के लिए नियम कानून बनाने का काम कर रही है, आने वाले समय में परेशानी होने वाली है.
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