रायपुर। छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना का बड़ा आधार खेती और किसान हैं। राज्य के लाखों किसान वर्षों से सिंचाई के लिए परंपरागत नहर प्रणाली पर निर्भर रहे हैं। यह व्यवस्था अपने समय में उपयोगी रही, लेकिन बदलते मौसम, जल संकट, बढ़ती आबादी और कृषि लागत के दौर में इसकी सीमाएँ अब स्पष्ट रूप से सामने आ चुकी हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा परंपरागत नहर आधारित सिंचाई के स्थान पर प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क (PIN) को अपनाने का निर्णय छत्तीसगढ़ के कृषि भविष्य को नई दिशा देने वाला सिद्ध होगा। यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, लागत नियंत्रण और किसान आय बढ़ाने की समग्र रणनीति है, जो साय सरकार की विकासोन्मुख सोच को दर्शाती है।

पारंपरिक नहर प्रणाली: समय की कसौटी पर असफल मॉडल

वर्तमान में छत्तीसगढ़ में अधिकांश सिंचाई परियोजनाएँ खुली नहर प्रणाली पर आधारित हैं। इस पद्धति में जल का बड़ा हिस्सा—रिसाव,वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण खेतों तक पहुँचने से पहले ही नष्ट हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रणाली की कुल सिंचाई दक्षता केवल 35 प्रतिशत के आसपास रहती है। यानी यदि 100 लीटर पानी छोड़ा जाए, तो मात्र 35 लीटर ही फसलों के काम आ पाता है। इसका सीधा नुकसान यह होता है कि टेल-एंड क्षेत्रों तक पानी नहीं पहुँचता, किसान असमान सिंचाई से जूझते हैं, जल स्रोतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

PIN (Pressure Irrigation Network) से मिल रहा आधुनिक समाधान

बहुत सी चुनौतियों के समाधान के रूप में प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क (PIN) सामने आया है। यह एक पाइपलाइन आधारित सिंचाई प्रणाली है जिसमें पानी को नियंत्रित दबाव के साथ सीधे खेतों तक पहुँचाया जाता है।इस तकनीक से पानी का रिसाव लगभग शून्य होता है।वाष्पीकरण नगण्य होता है और हर खेत तक समान रूप से जल की आपूर्ति होती है। इस तकनीक के परिणामस्वरूप सिंचाई दक्षता 65 प्रतिशत से अधिक तक पहुँच जाती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता से मिल रहा सु-परिणाम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में भोपाल के मध्य प्रदेश मॉडल, प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क के सफल क्रियान्वयन को देखकर उन्होंने स्पष्ट किया कि “कम पानी में अधिक सिंचाई ही भविष्य की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में इस तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।” यह बयान केवल घोषणा नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रति सजग नेतृत्व का परिचायक है। इस नई तकनीक से प्रदेश मे जल उपयोग दक्षता में वृद्धि, किसानों की उत्पादकता में सुधार और सिंचाई कवरेज में विस्तार जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आएँगे। साय सरकार ने छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों के अनुसार इसे अपनाने का निर्णय लिया है।

PIN तकनीक के बहुआयामी लाभ

  1. जल संरक्षण– PIN तकनीक से कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव होने से भू-जल और सतही जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे।
  2. किसानों की आय में वृद्धि– PIN तकनीक से होने वाले बेहतर जल प्रबंधन से फसल उत्पादकता बढ़ती है जिससे किसानों की आय में सीधी वृद्धि होती है।
  3. कम भूमि अधिग्रहण– PIN तकनीक से नहरों की तुलना में पाइपलाइन प्रणाली में भूमि अधिग्रहण न्यूनतम होता है जिससे सामाजिक विवाद और लागत दोनों में कमी आती है।
  4. ऊर्जा की बचत– PIN तकनीक में उच्च पंपिंग दक्षता के कारण बिजली की खपत कम होती है जो राज्य के ऊर्जा संसाधनों के लिए भी लाभकारी है।
  5. तेज और पारदर्शी क्रियान्वयन– PIN तकनीक में कम संरचनात्मक निर्माण होने से परियोजनाएँ समय पर पूरी होती हैं।

साय सरकार का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कृषि विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि सही तकनीक और समयबद्ध निर्णयों से संभव है। PIN तकनीक को चरणबद्ध ढंग से लागू करने के निर्देश देकर उन्होंने ताकीद की है कि पहले इसका परीक्षण फिर विस्तार और अंततः राज्यव्यापी क्रियान्वयन का संतुलित मॉडल अपनाया जाना चाहिए। प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क को अपनाने का निर्णय छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने वाला है।

इस तरह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय केवल वर्तमान की समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-सुरक्षित और समृद्ध कृषि भविष्य की नींव रख रहे हैं। नहरों की परंपरा से निकलकर आधुनिकता की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ आज यह संदेश दे रहा है कि विकास वही है जो किसान, पानी और पर्यावरण—तीनों को साथ लेकर चले।