Stock Market Strategy: शेयर बाजार (Stock Market) में माहौल काफी खराब नजर आ रहा है. सोमवार को बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली और इसके पहले शुक्रवार को भी निफ्टी अपने 20-Day EMA और 50-Day EMA से काफी नीचे बंद हुआ था. 

अब निफ्टी लगभग अपने 20-Week EMA के आसपास घूम रहा है, जो तकनीकी रूप से एक अहम सपोर्ट माना जाता है. इसके अलावा निफ्टी दिसंबर की ट्रेडिंग रेंज से भी नीचे फिसल चुका है, जिससे बाजार का सेंटिमेंट (Market Sentiment) और ज्यादा कमजोर हो गया है.

निफ्टी के अहम लेवल और आगे का खतरा

तकनीकी आंकड़ों (Technical Levels) की बात करें तो निफ्टी का 100-Day Moving Average करीब 25,600 पर है, जबकि नवंबर का क्लोजिंग लो लगभग 25,500 के आसपास है. अगर बाजार यहां से संभलता नहीं है और कोई बाउंस (Bounce) नहीं आता, तो अगला बड़ा सपोर्ट 200-Day Moving Average पर 25,250 के करीब माना जा रहा है. 

खास चिंता की बात यह है कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों (Midcap & Smallcap Stocks) में जबरदस्त बिकवाली हो रही है, जिससे पूरे बाजार पर दबाव बना हुआ है.

FII की भारी बिकवाली से बढ़ा डर

बाजार विशेषज्ञों (Market Experts) का कहना है कि इंडेक्स फ्यूचर्स में विदेशी निवेशकों यानी FII की बिकवाली तेज हो गई है. हाल के आंकड़ों के अनुसार, FII ने कैश मार्केट में करीब ₹3,769 करोड़ और इंडेक्स फ्यूचर्स में ₹3,195 करोड़ की बिकवाली की है. 

इससे उनकी नेट शॉर्ट पोजीशन (Net Short Position) बढ़कर 92.5% तक पहुंच गई है. दिलचस्प बात यह है कि पिछली बार जब FII इतनी ज्यादा शॉर्ट पोजीशन में थे, तब निफ्टी में करीब 1000 अंकों की तेज रिकवरी आई थी.

Trump vs Powell से ग्लोबल टेंशन

अमेरिका में भी हालात काफी तनावपूर्ण हैं. फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने एक बयान में कहा है कि ट्रम्प प्रशासन ने उनके खिलाफ आपराधिक जांच (Criminal Investigation) शुरू की है. 

ट्रम्प का आरोप है कि फेड ब्याज दरें (Interest Rates) कम नहीं कर रहा, इसलिए यह कदम उठाया गया है. इस खबर के बाद वॉल स्ट्रीट (Wall Street) में डर फैल गया और ग्लोबल मार्केट्स (Global Markets) में भी घबराहट बढ़ गई.

सोना, चांदी और तेल में तेज उछाल

इस डर का असर यह हुआ कि निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर भागने लगे. सोना (Gold) करीब 2% चढ़कर 4600 डॉलर के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया, जबकि चांदी (Silver) में करीब 5% की तेजी आई. 

ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) भी 63 डॉलर के पार चला गया. वहीं डॉव फ्यूचर्स (Dow Futures) करीब 200 अंक टूट गए, जिससे साफ है कि ग्लोबल सेंटिमेंट कमजोर बना हुआ है.

भारत-अमेरिका रिश्ते और इस हफ्ते के बड़े संकेत

इस हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा फैक्टर भारत-अमेरिका संबंध (India-US Relations) रहेंगे. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भारत आ रहे हैं, जो ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं. पिछले हफ्ते 500% टैरिफ की धमकियों और कुछ विवादित बयानों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई थी. अब यह देखना अहम होगा कि इस यात्रा से तनाव कम होता है या नहीं.

डॉलर-रुपया और IT स्टॉक्स पर दबाव

इस समय डॉलर-रुपया (Dollar-Rupee) 90 के ऊपर बना हुआ है, जो बाजार के लिए एक और चिंता की बात है. कमजोर रुपया और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण IT स्टॉक्स (IT Stocks) पर खासा दबाव देखने को मिल रहा है. ऊपर से इस हफ्ते अर्निंग्स सीजन (Earnings Season) भी पूरे जोर पर शुरू हो रहा है.

इस हफ्ते आने वाले बड़े नतीजे

आज TCS और HCL Tech अपने नतीजे घोषित करेंगे, बुधवार को Infosys के रिजल्ट आएंगे. शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद Reliance के नतीजे होंगे और शनिवार को HDFC Bank और ICICI Bank अपने आंकड़े जारी करेंगे. इन कंपनियों का निफ्टी में करीब 29.67% वेटेज है, यानी इनके रिजल्ट पूरे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.

तो निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

इस समय बाजार का सेंटिमेंट (Market Sentiment) बेहद नेगेटिव है, लेकिन फंडामेंटल्स (Fundamentals) अभी भी मजबूत नजर आ रहे हैं. इसका मतलब यह है कि निवेशकों को अच्छे शेयर सस्ते दामों पर मिल रहे हैं. हालांकि, ट्रेडिंग करने वालों को चार्ट और ट्रेंड (Charts & Trend) का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि गिरावट का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है.

मार्केट इस समय काफी ओवरसोल्ड (Oversold) है, इसलिए कभी भी तेज बाउंसबैक आ सकता है. लेकिन अगर आप दोनों तरफ ट्रेड नहीं कर सकते, तो बेहतर है कि इंडेक्स ट्रेडिंग से दूर रहें और अपनी पूंजी (Capital) बचाकर रखें.

दमानी का फॉर्मूला और लंबी अवधि की सोच

राधाकिशन दमानी का एक मशहूर नियम है कि अगर 50 पैसे की चीज 25 पैसे में मिल रही है, तो आपके पास 25 पैसे होना चाहिए. यानी जब अच्छे शेयर सस्ते मिल रहे हों, तब आपके पास निवेश करने के लिए पैसा होना चाहिए. इस समय रणनीति यही है कि फंडामेंटली मजबूत (Fundamentally Strong) शेयरों की एक लिस्ट बनाएं और हर गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी (Buy on Dips) करते रहें.

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