सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, ‘आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।’ कोर्ट ने कहा- पिछली सुनवाई की टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा। हम गंभीर हैं। कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से वह पीछे नहीं हटेगा। क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा- कोर्ट निजी पक्षों की दलीलें पूरी करके आज ही सुनवाई खत्म करना चाहती है। इसके बाद राज्यों को एक दिन का मौका दिया जाएगा। आज की सुनवाई में- पीड़ितों की ओर से एडवोकेट हर्ष जैदका, डॉग लवर्स/एनजीओ की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण, मेनेका गांधी की ओर से सीनियर एडवोकेट रजू रामचंद्रन दलीलें दे रहे हैं।

मेनका गांधी को लेकर कहा- कोर्ट की महानता थी कि अवमानना कार्रवाई नहीं की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एनिमल एक्टिविस्ट और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर कड़ी टिप्पणी की। टॉप कोर्ट ने एक पॉडकास्ट के दौरान आवारा कुत्तों के मामले में कोर्ट की टिप्पणियों पर उनकी बॉडी लैंग्वेज और बयानों पर सवाल उठाया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह कोर्ट की महानता थी कि उसने अवमानना की कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब उसने आवारा कुत्तों के हमलों के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जिम्मेदार बनाने की बात कही थी, तो वह गंभीर था।

सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी के बयानों पर कड़ी टिप्पणी की

कोर्ट ने गांधी के वकील राजू रामचंद्रन से कहा, ‘कुछ देर पहले, आप कोर्ट से कह रहे थे कि हमें सावधान रहना चाहिए। क्या आपने पता लगाया कि आपकी क्लाइंट किस तरह की टिप्पणियां कर रही हैं? आपकी क्लाइंट ने अवमानना की है। हम उस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह हमारी महानता है। क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है? वह क्या कहती हैं और कैसे कहती हैं।’ बेंच ने कहा, ‘आपने टिप्पणी की कि कोर्ट को सावधान रहना चाहिए। दूसरी ओर, आपकी क्लाइंट जिसे चाहे और जिस पर चाहे, हर तरह की टिप्पणियां कर रही हैं।’

कोर्ट ने मेनका गांधी के पॉडकास्ट को अवमानना माना

रामचंद्रन ने कहा कि ये टिप्पणियां टेलीविजन पर दिखाई जा रही हैं और बार और बेंच दोनों की जिम्मेदारी है। इस पर बेंच ने जवाब दिया ‘हाँ, इसी वजह से हम खुद को और भी कई टिप्पणियां करने से रोक रहे हैं।’ पिछले हफ्ते इस मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा था कि वह राज्य सरकारों से हर उस आवारा कुत्ते के हमले के लिए भारी मुआवजा देने को कहेगा जिससे बच्चों या बुज़ुर्गों की मौत या चोट लगती है। साथ ही, इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। बेंच ने पूछा, ‘अगर आप इन जानवरों से इतना प्यार करते हैं, तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते क्यों इधर-उधर घूमें, लोगों को काटें?

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