रोहित कश्यप, मुंगेली l शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों की हकीकत जब जर्जर दीवारों, टूटे फर्श और खपरा वाली छतों के नीचे सिमट जाए तो सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का भी उठता है। मामला है रवीद्र भारती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मदनपुर का, जहां नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई और इस समय बोर्ड परीक्षा, दोनों अव्यवस्थाओं के साये में संचालित हो रहे हैं l विद्यालय परिसर में पुराने खपरा (टाइल्स) वाले मकान भी शामिल हैं, जिनकी हालत किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता देती प्रतीत होती है।

दीवारों में दरारें, झड़ता प्लास्टर और कमजोर ढांचा साफ संकेत दे रहा है कि भवन अपनी उम्र पूरी कर चुका है। ऐसे हालात में सवाल उठता है कि क्या व्यवस्था के अभाव के बीच ही स्कूल संचालन हो रहा है? 500 से ज्यादा विद्यार्थी यहां अध्ययनरत हैं। नर्सरी से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं इन्हीं जर्जर कमरों में लग रही हैं। बुनियादी सुविधाओं का टोटा अलग है। न समुचित बैठक व्यवस्था, न पर्याप्त उजाला। साफ-सफाई की स्थिति भगवान भरोसे। जब रोजमर्रा की पढ़ाई ही समस्याओं से घिरी हो तो फिर परीक्षा का माहौल कैसा होगा, सहज ही समझा जा सकता है।

सेंटर कैसे बना दिया गया?

इन दिनों 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी यहीं आयोजित की जा रही है। परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य को भी समस्यामूलक प्रबंध के बीच संपन्न कराया जा रहा है, जो कई सवाल खड़े करता है। क्या परीक्षा केंद्र निर्धारण से पहले जमीनी हकीकत का आकलन किया गया था? या फिर कागजी औपचारिकताओं के आधार पर ही मुहर लगा दी गई? स्थिति की गंभीरता तब सामने आई, जब बोर्ड परीक्षा के नोडल अधिकारी मायानंद चंद्रा ने मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अव्यवस्थाओं की परतें खुलती चली गईं। तत्परता दिखाते हुए साफ-सफाई करवाई गई और बल्ब लगाकर रोशनी की अस्थायी व्यवस्था की गई है, लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि क्या व्यवस्थाएं सिर्फ निरीक्षण के दिन ही जागती हैं?

विद्यालय में लड़कों के लिए समुचित प्रसाधन (शौचालय) की व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में नियमित पढ़ाई और परीक्षा दोनों प्रभावित होना स्वाभाविक है। बच्चे धूल, घुटन और असुरक्षित ढांचे के बीच बैठकर अपना भविष्य लिख रहे हैं। यह स्थिति न केवल उनकी पढ़ाई पर असर डालती है, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ाती है।

नोडल अधिकारी ने नियमानुसार कार्रवाई के दिए निर्देश

जिला प्रशासन की तरफ से नियुक्त 10वीं, 12वींं बोर्ड एग्जाम के नोडल अधिकारी मायानन्द चंद्रा ने इस मामले पर लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए जिम्मेदारों पर नाराजगी जताते हुए स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब करने और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश शिक्षा विभाग के अफसरों को दिए हैं। इसके साथ ही उच्च अधिकारियों को इसके बारे में अवगत कराते हुए मार्गदर्शन और दिशा निर्देश प्राप्त कर आगे की कार्रवाई विधिवत कि जाएगी।

सवाल ये भी हैं..

बड़ा प्रश्न यही है कि जब हालात इतने खराब थे तो आखिर किस आधार पर यहां पढ़ाई और परीक्षा दोनों का संचालन जारी रखा गया? क्या मॉनिटरिंग व्यवस्था सिर्फ फाइलों तक सीमित है? अव्यवस्थाओं के बीच जारी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा यह संकेत देती है कि सिस्टम शायद हालात से आंखें मूंदे बैठा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां शिक्षा नहीं, बल्कि जोखिम का संचालन हो रहा है, जहां बच्चे किताबों से ज्यादा व्यवस्थागत खामियों से जूझ रहे हैं।