Success Story: इस आदिवासी किसान ने बदली खेती की सोच, पारंपरिक खेती को छोड़ा और बन गया लखपति

भानुप्रतापपुर। खेती किसानी छोड़कर लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. पलायन करने की वजह रोजगार, परिवार की रोजी रोटी और लालन पालन. इनमें से बहुत से वे लोग भी हैं जिनके पास खेती के लिए कृषि भूमि भी है लेकिन कभी मौसम की मार तो कभी खराब बीज, कभी कीट प्रकोप तो कभी किन्हीं वजहों से फसलें बर्बाद होने के बाद पलायन करने लगते हैं. पलायन करने के बाद ये ग्रामीण अक्सर नौकरी की तलाश में जहां जाते हैं वहां इन्हें बंधक बनाए जाने की भी खबर आते रहती है. कम खेती होना या खेती में आमदनी कम होने की एक वजह पारंपरिक तरीकों से खेती करना भी है. लेकिन इन सबके बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने बहुत कम कृषि भूमि में पारंपरिक खेती से अलग हट कर लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं. ऐसे लोग उन सभी लोगों के लिए एक उदाहरण हैं जिनके लिए खेती घाटे का सौदा है.

हम बात कर रहे हैं कांकेर जिले के चारामा विकासखंड स्थित तिरकादंड गांव में रहने वाले किसान पुरुषोत्तम मंडावी की. पुरुषोत्तम मंडावी के पास महज 5 एकड़ पैतृक खेत है. खेत में सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण वे साल में एक ही फसल ले पाते थे. वे भी आम किसानों की तरह पारंपरिक धान की खेती किया करते थे.  धान बेचने के बाद उन्हें बमुश्किल प्रति वर्ष 60 से 70 हजार रुपए की ही आमदनी हो रही थी. जिससे उनके परिवार का खर्चा भी ठीक से नहीं चल पा रहा था.

पुरुषोत्तम मंडावी भी अपने और अपने परिवार के लिए कई सपने संजो कर रखे थे लेकिन इतनी कम आमदनी में सारे ख्वाब केवल ख्वाब ही बनकर रह गए. पुरुषोत्तम मंडावी लखपति बनने के अपने ख्वाब को पूरा करना चाहते थे. उन्होंने अखबारों में ऐसे कई किसानों व लोगों के बारे में पढ़ा था जो लीक से अलग हटकर काम किए और खुद को एक मिसाल के रुप में स्थापित कर चुके हैं. पुरुषोत्तम मंडावी अक्सर ही लोगों से इस बाबत जिक्र किया करते थे. इसी बीच किसी ने उन्हें कृषि विज्ञान केन्द्र के बारे में बताया. जहां से वे आधुनिक और वैकल्पिक खेती की जानकारी लेकर अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं.

कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के संपर्क में आने के बाद मंडावी अपने खेतों में लाख उत्पादन के लिए प्रेरित हुए. उन्होंने वर्ष 2015-16 में प्रायोगिक तौर पर एक एकड़ क्षेत्र में सेमियालता के पौधे लगाया. उन पौधों पर उन्होंने लाख के कीडे़ पाल कर लाख उत्पादन शुरू किया. पहले वर्ष में पांच क्विंटल लाख का उत्पादन हुआ, जिससे उन्हें एक लाख रूपये की आमदनी हुई. शेष चार एकड़ खेत में धान की फसल से लगभग 60 हजार रूपये की आय प्राप्त हुई. लाख उत्पादन की सफलता से प्रेरित हो कर उन्होंने वर्ष 2016-17 में चार एकड़ क्षेत्र में सेमियालता के पौधे लगाकर लाख उत्पादन किया और केवल एक एकड़ क्षेत्र में धान की फसल ली. इस वर्ष 26 क्विंटल लाख उत्पादन हुआ जिससे उन्हें पांच लाख 20 हजार रूपये आय हुई जबकि धान की फसल से 20 हजार रूपये की आमदनी हुई. इस प्रकार लाख की खेती अपनाने से मंडावी की आय में 6 से 7 गुना इजाफा हुआ. लाख की खेती ने मंडावी की जिंदगी ही बदल दी. आज वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं.

तीन वर्ष पूर्व तक अपनी पांच एकड़ पैतृक भूमि पर परंपरागत रूप से धान की खेती कर प्रति वर्ष 60 से 70 हजार रूपये की आमदनी लेने वाले मंडावी कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के मार्गदर्शन में लाख की खेती कर आज प्रति वर्ष पांच लाख रूपये से अधिक की आय प्राप्त कर रहे हैं. कृषि के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मंडावी को कृषक समृद्धि सम्मान 2017 से सम्मानित किया गया है.

 

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