ऐसी है एमपी की पुलिस : देश की सीमा में तैनात जवान को भी न्याय के लिए लगानी पड़ रही गुहार, ऑडियो वायरल

सतना। मैहर की नामी कंपनी के. जे .एस. के रिहायशी कंपाउंड में लाखों रुपए के जेवरात और नकदी की चोरी की वारदात के बाद भी पुलिस के हाथ खाली है। जीवनभर की कमाई और जमापूंजी चोरी हो जाने के बाद देश की सीमा की सुरक्षा में तैनात जवान का एमपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाना लाजिमी है। उन्होंने ऑडियो वायरल कर एमपी पुलिस के आला अधिकारियों सहित मीडिया से मदद की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार जिस इलाके में चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया है वो पूरा इलाका बाउंड्रीवाल से घिरा हुआ है। उस इलाके की सुरक्षा के लिए कंपनी के कर्मचारी भी तैनात रहते हैं। कॉलोनी में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। वारदात के एक सप्ताह बाद भी पुलिस चोरों का सुराग नहीं लगा पाई है। ऐसे में सवाल उठता है कि के. जे. एस. सीमेंट कंपनी द्वारा मुहैया कराई गई सुरक्षा कितनी पुख्ता हैं। चोर जेवरात पर हाथ साफ कर फरार हो गया और उन्हें भनक तक नहीं लगी।

पीडि़त जम्मू काश्मीर में सीमा की सुरक्षा में तैनात
इस मामले में पीडि़त के पिता का एक ऑडियो भी वायरल हो हुआ है। वे जम्मू काश्मीर में सीमा की सुरक्षा में तैनात हैं। उनकी शिकायत है कि चोरी होने के इतने दिनों बाद भी पुलिस मामले में किसी तरह का सुराग नहीं लगा पाई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने ऑडियो के जरिए मीडिया से गुहार लगाई है कि अब इस मामले में मीडिया अपनी दखंलदाजी करें जिससे उनके घर हुई चोरी का पर्दाफाश हो सके।

सीमा पर तैनात सैनिक के मुताबिक उनके घर में लगभग 20 लाख की चोरी
वायरल ऑडियो के मुताबिक उन्होंने पुलिस और सीमेंट कंपनी के आला अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक किसी तरह की राहत नहीं मिली है। सीमा पर तैनात सैनिक के मुताबिक उनके घर में लगभग 15 से 20 लाख रुपए की चोरी हुई है। चोरों ने नकदी सहित सोने-चांदी और हीरे के जेवर चोरी कर ली है। उन्होंने यह भी बताया कि वारदात के दिन एक अन्य घर से लगभग ढाई लाख रुपए के जेवर की चोरी हुई है। इस दिन चोरों ने आठ घरों के ताले तोड़े थे। चोरी की इतनी बड़ी वारदात के बाद भी मीडिया में एक लाइन की खबर नहीं छपी है। इससे पुलिस की जांच और कार्यशैली का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने रीवा जिले के एसपी, आईजी सहित एडीजीपी से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने चोरी की शिकायत पुलिस हेल्पलाइन में भी की है। उन्होंने नागरिकों से राज्य के डीजीपी के फोन या वाट्सऐप नंबर बताने का आग्रह किया है।

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