जुबैर अंसारी, सुपौल। बिहार में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली सुधारने के उद्देश्य से गुरुवार 5 मार्च को सुपौल DM सावन कुमार ने छातापुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय समेत मनरेगा कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। करीब पौने बारह बजे अचानक पहुंचे डीएम सावन कुमार के निरीक्षण से पूरे कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान बीडीओ, सीओ, मनरेगा पीओ समेत कई कर्मी कार्यालय से अनुपस्थित पाए गए, जिससे डीएम का गुस्सा सातवें आसमान पर नजर आया।

फिर क्या था? नायक फिल्म के हीरो के तरह ऑन द स्पोर्ट सख्त कार्रवाई के संकेत देते हुए कहा कि, अनुपस्थित कर्मियों के वेतन में कटौती की जाएगी और संविदा कर्मियों को बर्खास्त किया जाएगा। डीएम सावन कुमार ने निरीक्षण के दौरान अपने बॉडीगार्डों को परिसर में तैनात कर कार्यालय के मुख्य गेट को बंद करा दिया और विभिन्न कक्षों में जाकर व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान अधिकांश कक्षों में कर्मचारी अनुपस्थित मिले। कई कमरों में ताला लटका मिला तो कहीं कर्मचारी देर से पहुंचते नजर आए। डीएम के अचानक पहुंचने से पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

निरीक्षण के दौरान बीडीओ डॉ.राकेश गुप्ता और मनरेगा पीओ कार्यलय से नदार्द थे। जब की अंचल अधिकारी भी कार्यालय से बाहर पाए गए। जब वे दौड़ते-भागते कार्यालय पहुंचे तो मुख्य गेट बंद होने के कारण उन्हें अंदर प्रवेश नहीं मिला। बाद में वे ग्रामीण बैंक के पास स्थित पिछले रास्ते से परिसर में पहुंचे। जैसे ही सीओ डीएम के सामने पहुंचे तो डीएम ने उनकी जमकर क्लास लगाई और कार्यालय व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

इस बीच डीएम उस समय और भी हैरान रह गए जब उनके पहुंचने के बाद ही सफाई कर्मी झाड़ू लेकर परिसर की सफाई करते दिखाई दिए। इससे स्पष्ट हो गया कि कार्यालय में नियमित रूप से साफ-सफाई भी नहीं हो रही थी। निरीक्षण के दौरान कई संविदा कर्मी भी ड्यूटी से गायब पाए गए।

कार्यालय परिसर में सीडीपीओ रजनी गुप्ता भी पिछले दरवाजे से पहुंचीं, जिनसे डीएम ने आंगनबाड़ी से जुड़े कार्यों की जानकारी ली। इसके अलावा डीएम ने पदस्थापित महिला पर्यवेक्षिकाओं के बारे में पूछताछ करते हुए उनका तत्काल मोबाइल लोकेशन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कुमार ने बताया कि पूर्वाह्न पौने बारह बजे तक बीडीओ, सीओ, मनरेगा पीओ और एमओ अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा संविदा लिपिक रामनारायण झा, रतन कुमार, ऑपरेटर पूजा कुमारी सहित कई संविदा कर्मी भी अनुपस्थित पाए गए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि, बिना सूचना अनुपस्थित सभी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए प्रपत्र ‘क’ गठित करने की अनुशंसा की जाएगी।इसके बाद डीएम अचानक मनरेगा कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने मौजूद मनरेगा अकाउंटेंट राजेश कुमार से अनुपस्थित कर्मियों के बारे में जानकारी ली।

डीएम ने बताया कि, मनरेगा पीओ ने 6 और 7 मार्च को अवकाश का आवेदन दिया था, लेकिन वे 5 मार्च को ही कार्यालय से गायब पाए गए, जो गंभीर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके वेतन से इस माह 70 प्रतिशत तक कटौती कराने का प्रयास किया जाएगा तथा विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

डीएम ने साफ शब्दों में कहा कि, सरकारी कार्यालयों में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए गए संविदा कर्मियों को सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना शाम तक भेज दी जाएगी। अचानक हुए इस निरीक्षण से पूरे छातापुर प्रखंड कार्यालय में दिनभर हड़कंप की स्थिति बनी रही। कई कर्मचारी जो देर से पहुंचे थे, वे डीएम के सख्त तेवर देखकर सहमे नजर आए।

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