जुबैर अंसारी/सुपौल। भारतमाला परियोजना पैकेज-5 के तहत विकास की वेदी पर चढ़ी सुपौल के सिहे गांव की जामा मस्जिद अब भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और निर्माण कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए 81 लाख रुपये के गबन की आशंका जताई है।
भरोसा देकर तोड़ी गई मस्जिद
ग्रामीणों के अनुसार, परियोजना के विस्तार के लिए प्रशासन के आदेश पर पुरानी जामा मस्जिद को इस वादे के साथ ढहाया गया था कि इसका भव्य पुनर्निर्माण कराया जाएगा। निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन धारीवाल कंपनी के निदेशक ओम कुमार केवल छत की ढलाई कराकर काम बीच में ही छोड़कर गायब हो गए। संपर्क करने पर कंपनी का कहना है कि बजट खत्म हो चुका है और री-एस्टीमेट फाइल विभाग को भेजी गई है।
अधिकारियों और कंपनी के बीच मिलीभगत का आरोप
ग्रामीण मोहम्मद अकबर और मोहम्मद यूनुस ने सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों और कंपनी के बीच साठगांठ का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि डीएम द्वारा प्रतिनियुक्त DCLR अली एकराम, परियोजना निदेशक मुकेश कुमार परगैनिया, इंजीनियर राहुल और मैनेजर सौरभ कुमार चौधरी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। बीते एक साल से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है और जिम्मेदार अधिकारी कार्यस्थल से नदारद हैं।
65×40 की संरचना और बजट का खेल
ग्रामीणों का तर्क है कि 65×40 फीट की मस्जिद के लिए आवंटित 81 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि महज छत की ढलाई में कैसे खत्म हो गई, यह जांच का विषय है। ग्रामीणों ने अब मस्जिद कमेटी से पाई-पाई का हिसाब और खर्च का आधिकारिक ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
आक्रोश: धार्मिक गतिविधियों पर असर
सैकड़ों लोगों की आस्था का केंद्र रही इस मस्जिद का निर्माण अधूरा रहने से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। नमाज और अन्य धार्मिक आयोजनों में हो रही असुविधा को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
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