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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार की आपत्ति के बाद एक बार फिर से गे वकील को जज बनाने का प्रस्ताव भेजा है. विवाद के केंद्र में वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल हैं, जिनके विदेशी सहचर पर सुरक्षा एजेंसियों की आपत्तियों पर सरकार ने कॉलेजियम का ध्यान खींचा था. इसके अलावा कॉलेजियम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले एक वकील को भी जज बनाने का प्रस्ताव दिया है.
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल को दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की 11 नवंबर, 2021 की अपनी सिफारिश को दोहराया है. कॉलेजियम ने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सौरभ कृपाल की नियुक्ति का प्रस्ताव पांच साल से अधिक समय से लंबित है, जिस पर तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता है.
तथ्य यह है कि कृपाल अपने ओरिएंटेशन (समलैंगिक यौन रुचि) के बारे में खुले हैं, यह एक ऐसा मामला है, जिसका उन्हें क्रेडिट जाता है. न्यायपालिका के लिए एक संभावित उम्मीदवार के रूप में वह अपने ओरिएंटेशन के बारे में गोपनीय नहीं रहे हैं. संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कॉलेजियम उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करता है. इस आधार पर उनकी उम्मीदवारी को खारिज करना यह स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत होगा.
राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कहा कि इस बात की कोई आशंका नहीं है कि कृपाल के साथी के व्यवहार का राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई असर पड़ता है. यह मानने का कोई कारण नहीं है कि उम्मीदवार का साथी, जो एक स्विस नागरिक है, हमारे देश के लिए शत्रुतापूर्ण व्यवहार करेगा, क्योंकि उसका मूल देश एक मित्र राष्ट्र है.
पूर्व सीजीआई पुत्र हैं सौरभ
सौरभ कृपाल देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीएन कृपाल के पुत्र हैं. कॉलेजियम ने सौरभ की दोबारा सिफारिश करते हुए अपने प्रस्ताव में कहा कि वर्तमान और अतीत सहित उच्च पदों पर कई व्यक्ति संवैधानिक पदों के धारकों के पति-पत्नी विदेशी नागरिक हैं, और रहे हैं. इसलिए सिद्धांत रूप में इस आधार पर सौरभ की उम्मीदवारी पर कोई आपत्ति नहीं हो सकता कि उनका साथी विदेशी नागरिक है. इस सिफारिश पर तीव्रता से कार्रवाई करने की आवश्यकता है.
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