अजय नीमा, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश व शिवलिंग को स्पर्श करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका आज खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी की गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं को भी प्रवेश मिले। इसी दलील पर दरअसल अगस्त 2025 में इंदौर हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि  महाकाल मंदिर के गर्भगृह में कौन जाए कौन नहीं यह मंदिर समिति व जिला कलेक्टर तय करेगा।

बता दें कि वर्ष 2022 में महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन 3 से 4 गुना बढ़ गई। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। हालांकि विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ वीआईपी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है और आम श्रद्धालु बाहर से ही दर्शन करते है।

महाकाल मंदिर में दर्शन की अलग-अलग व्यवस्था है। वीवीआईपी श्रद्धालु गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। उसके बाद कुछ श्रद्धालुओं को गर्भगृह की चौखट तक प्रवेश मिलता है, कुछ श्रद्धालु नन्दी हाल में बैठकर दर्शन करते हैं। बाकी सब आम श्रद्धालुओं को बैरिकेड से ही दर्शन करवाए जाते है।

बीती 1 जनवरी को उज्जैन के सांसद अनिल फिरोज या महाकाल मंदिर पहुंचे थे और आम श्रद्धालुओं की पीड़ा को देखते हुए वह खुद आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन किए और दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठाएं। सांसद ने एक सभा में मंच पर मुख्यमंत्री से मांग की थी कि आम श्रद्धालुओं को भी 2 घंटे मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश दिया जाए।

आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह निर्णय देने पर की मंदिर में दर्शन व्यवस्था से जुड़े निर्णय कलेक्टर लेगा। इसके बाद फिर से मामला गरमाया गया है और अब जनप्रतिनिधि व आम लोगों की बातों का दम मिलेगा और पूर्व से की जा रही मांग फिर से उठने लगेगी।

सांसद अनिल फिरोजिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा की यह व्यवस्था पहले से तय थी कि कौन गर्भगृह में जाए कौन नहीं यह कलेक्टर ही तय करता है। मेरा यह मानना है कि राजा हो या रंक भगवान के लिए सब बराबर है। इसलिए अगर VIP गर्भगृह में जाते हैं तो आम नागरिक को भी मौका मिलना चाहिए। मैंने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि गर्भगृह में 2 घंटे के लिए आम श्रद्धालुओं को भी अनुमति मिले। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है वह जल्द उचित निर्णय लेंगे। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में आम श्रद्धालु भी गर्भगृह में जा सकेंगे।

वहीं VIP के गर्भगृह में प्रवेश के विरोधाभास पर सांसद ने कहा कि यह कलेक्टर तय करता है कि कौन गर्भगृह में जाए कौन नही। अभी कौन जाता है और किसे रोका जाता है यह कलेक्टर ही बता पाएंगे।

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