884 करोड़ की लागत से बना सर्वोच्च न्यायालय का नया भवन, खासियत जानकर आप भी कहेंगे नए भारत की है यह पहचान…

सर्वोच्च न्यायालय के अतिरिक्त भवन का बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उद्घाटन किया. जगह के साथ-साथ यह नई इमारत निर्माण के लिहाज से भी खास है. इसकी खासियत जानकार आप भी कहेंगे यह है नए भारत की पहचान…

नई दिल्ली। मथुरा रोड पर बने सुप्रीम कोर्ट के नए भवन की जगह पहले अप्पू घर हुआ करता था. भवन निर्माण के लिए वर्ष 2012 में शिलान्यास किया गया था. 1,80,700 वर्ग मीटर में बने नए भवन के बेसमेंट से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य कैंपस से कनेक्ट है. भवन में दो ऑडिटोरियम हैं. यही नहीं छत पर सोलर पावर ग्रिड बनाया गया है, जिससे 1400 किलोवॉट बिजली बनेगी. इससे भवन की 40 फीसदी बिजली की खपत पूरी हो जाएगी. इसके अलावा बिल्डिंग में सेंसर लगे एलईडी लाइट लगाए गए हैं, जिससे किसी जगह पर कोई नहीं होगा तो लाइट खुद बंद हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के पुराने भवन में पार्किंग एक बहुत बड़ी समस्या है, इसे ध्यान में रखते हुए नए भवन में 1800 कारों की क्षमता वाले तीन स्तरीय पार्किग का निर्माण किया गया है. इसके अलावा भवन में सुप्रीम कोर्ट का रिकार्ड रूम, लाइब्रेरी, वकीलों के चैम्बर के अलावा ऑडिटोरियम और मल्टीपरपस हाल है. वहीं सुप्रीम कोर्ट की पुरानी बिल्डिंग तक जाने के लिए नई बिल्डिंग से तीन भूमिगत रास्ते बनाए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के नए भवन के छत में लगे सोलर पैनल.

9 मंजिला नए भवन की सबसे खास बात यह है कि इसके निर्माण में मिट्टी से बनी ईंटों का इस्तेमाल नहीं हुआ है, बल्कि सीमेंट ब्लॉक का इस्तेमाल हुआ है. पर्यावरण के अनुकूल बनाए गए इस भवन में सूरज की रोशनी और हवा खूब आएगी. नई बिल्डिंग में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है, जिससे वेस्ट की रिसाइकलिंग हो सके. वहीं वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए हर साल एक लाख लीटर पानी बचाएगी.

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