दिल्ली की सीमाओं पर स्थित टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने के लिए दो महीने का समय मांगे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की ओर से किए गए इस अनुरोध पर देश की सर्वोच्च अदालत ने फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि CAQM अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि वायु प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों पर ढिलाई और देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर पर गहरी चिंता जताते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस दौरान अदालत ने एनएचएआई और एमसीडी से कहा था कि वे राष्ट्रीय राजधानी की सीमा पर स्थित 9 टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने पर विचार करें, ताकि शहर में यातायात जाम और प्रदूषण दोनों में कमी लाई जा सके। इसी मामले में टोल प्लाजा बंद या शिफ्ट करने के लिए दो महीने की समय-सीमा मांगे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर देरी स्वीकार्य नहीं है और CAQM अपने दायित्व निभाने में विफल रहा है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली सीमा पर स्थित टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने के मुद्दे पर दो महीने का स्थगन मांगा। इस अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि टोल प्लाजा से जुड़े मामले पर किसी भी तरह के दबाव या अलग-अलग हितधारकों के रुख से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए।

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