सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना (Telangana) के 10 बागी BRS विधायकों की अयोग्यता वाले मामले में सुनवाई की. गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CM रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) को उनके बयान पर फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने कहा कि एक साल भी नहीं हुआ है और आप फिर से इस तरह के बयान दे रहे हैं, कोर्ट ने कहा क्या आपके खिलाफ कोई एक्शन न लेकर हमने गलती कर दी है.
दरअसल कोर्ट इस बात से नाराज था कि सीएम रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में इस मामले को लेकर बयान दिया है, जबकि उनको इस मामले में टिप्पणी करने पर पहले ही टोका जा चुका है फिर भी वह चुप नहीं हुए. मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है इस वजह से कोर्ट ने उन्हे यह हिदायत दी थी.
गौरतलब हे कि पिछले साल दिल्ली शराब नीति मामले में भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता के. कविता को बेल दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट फैसले पर रेवंत रेड्डी ने टिप्पणी की थी. रेड्डी ने कहा था कि बीआरएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच डील हुई है. उनके इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद रेवंत रेड्डी ने माफी मांगी और कोर्ट ने स्वीकार कर ली थी. अब उन्होंने विधानसभा में स्पीकर की मौजूदगी में सख्त लहजे में कहा है कि किसी सूरत में उपचुनाव नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट उस मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस के कुछ विधायकों को अयोग्य ठहराने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर फैसला लेने में तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष की ओर से देरी का मुद्दा उठाया गया था. जानकारी के अनुसार जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी.
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सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से आर्यामा सुंदरम ने बताया कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान एक बीआरएस विधायक ने सीएम रेड्डी से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर सदन में चर्चा नहीं होनी चाहिए क्योंकि मामला वहां विचाराधीन है, फिर भी मुख्यमंत्री ने उनकी बात नहीं सुनी और कहा, ‘हम जो चाहते हैं वो हमें बोलने की आजादी है.’
अधिवक्ता आर्यामा सुंदरम ने सीएम का बयान कोर्ट में दोहराया और कहा, ‘स्पीकर साहब, मैं (सीएम) आपकी तरफ से विधानसभा सदस्यों से कह रहा हूं कि उन्हें किसी उपचुनाव को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है. कोई उपचुनाव नहीं होगा, विपक्ष चाहे तो भी नहीं. चाहे विपक्षी विधायक यहां आए या वहीं रहें, लेकिन उप चुनाव नहीं होगा.’ अधिवक्ता ने बताया कि यहां पर बीआरएस विधायक ने उन्हें टोका तो सीएम ने कहा, ये सदन कुछ कानूनों से प्रतिरक्षित है और अगर मैं सदन में कुछ बोल रहा हूं तो यहां प्रोटेक्शन है.’
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अधिवक्ता ने कहा कि स्पीकर ने मुख्यमंत्री को एक बार भी नहीं टोका कि वे ऐसा उनकी तरफ से कैसे बोल सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री के बयान से असहति जताते हुए कहा, ‘क्या कोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार करके और कोई एक्शन नहीं लेकर गलती कर दी है? एक साल भी नहीं हुआ है और उनसे ये भी उम्मीद नहीं कर सकते कि वह थोड़ा संयम बरतेंगे?’
बता दें कि एक याचिका में तीन बीआरएस विधायकों को अयोग्य ठहराने के अनुरोध वाली याचिकाओं से संबंधित मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट के नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई है. वहीं दूसरी याचिका दलबदल करने वाले शेष सात विधायकों से संबंधित है. नवंबर साल 2024 में हाईकोर्ट ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को तीनों विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय के अंदर फैसला करना चाहिए.
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हाईकोर्ट का फैसला एकल न्यायाधीश के नौ सितंबर, 2024 के आदेश के खिलाफ अपील पर आया. एकल न्यायाधीश ने तेलंगाना विधानसभा के सचिव को निर्देश दिया था कि वह चार सप्ताह के भीतर सुनवाई का कार्यक्रम तय करने के लिए अयोग्यता के अनुरोध वाली याचिका को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष रखें.
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