वाराणसी. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गाय और सनातन की रक्षा के लिए 11 मार्च को लखनऊ में सभा करेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे साथ कौन खड़ा है, कौन नहीं, यह वहां पहुंचने के बाद ही साफ होगा. उन्होंने कहा कि सभी शंकराचार्य से आदेश लेकर यह धर्मयुद्ध शुरू किया गया है, जिसकी शुरुआत काशी से हुई है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आज हमने काशी के शंकराचार्य घाट पर माता गंगा की पूजा-अर्चना करके वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई है. शिवाजी महाराज का इतिहास गौ माता की रक्षा से जुड़ा हुआ है. बचपन में ही उन्होंने गौ माता को कसाई से बचाने के लिए संघर्ष किया था. इससे यह संदेश मिलता है कि सच्चा हिंदू किसी भी परिस्थिति में गौ हत्या को सहन नहीं कर सकता.

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स्वामी ने कहा कि जो व्यक्ति वहां आकर अभियान में खड़ा होगा, वही हमारा समर्थक माना जाएगा, जो अपनी मजबूरी बताएगा, उसे भी समझा जाएगा, लेकिन जो नहीं आएगा, उसे आंदोलन का हिस्सा कैसे माना जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह गौ माता की रक्षा का विषय है. इसके लिए किसी को निमंत्रण देने की जरूरत नहीं होती. जिसे गौ माता की रक्षा की चिंता होगी, वह स्वयं आ जाएगा. उन्होंने कहा कि चारों पीठ के शंकराचार्यों के आशीर्वाद से चल रहा है. फिलहाल इसे गोपाल मणि जी आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन समय आने पर चारों शंकराचार्य एक साथ दिखाई देंगे. दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में भी उनका आना संभव है.